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पारिणामिक्यां श्रीअभय
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श्रोउपदे-1 ॥९३।। उज्जेणीए अह अन्नया उ असिवं समुट्ठियं भीमं । रायाभयमापुच्छइ सो एवं तं पडिभणाइ । ९४।। अत्थाशपदे
णीए अब्भंतराए सिंगारसारदेहाओ। देवीओ इंतु तुज्झे पडिगा हियरायलकारे ॥९५।। जा नियदिट्ठीए जिणेइ तं लहुं मम कहेह तह चेव । विहियं अहोमुहीओ ठियाओ सव्वाओ मेोत्तूण ।।९६।। देविं सिवं निवेइयमेयं तव तुल्लमाउगाइ जिओ। भणइ य वसणा राओ तहाढगबलिं गहेऊण ॥९७।। सायं भूयं उद्वेइ जत्थ अट्टालगाइठाणेसु । तस्स मुहम्मि
छुहिज्जा कूरं तह चेव विहियम्मि ॥९८।। जाओ असिवोवसमो लद्धो उ वरो चउत्थमो तत्तो। चिंतइ अभओ किञ्चिरमच्छीहामो परगिहम्मि ॥९९।। मग्गइ पुव्वुवलद्ध वरे निवाओ जहानलगिरिम्मि। तुब्भेसु मिठभावंगएसु देवीए उच्छंगे ।।१००॥ रहअग्गिभीरुदारुयभारेण जलणं विसामिच्छा । अत्थि ममं तो कीरउ निव्वहणं निययवयणस्स ॥१०१।। नियठाणमिच्छइ इमो गंतुं इइ भाविऊण काऊण । सक्कारमइमहंतं विस जिओ तेण तो अभओ ।।१०२।। अह भणइ इमो धम्मच्छलेण तुब्भेहि आणिओ हमिहं । काउ दीवगमाइञ्चमारडंतो जइ न नेमि ।।१०३।। नयरीलोयसमक्खं बंधेउ अभयनामगो संतो । तुब्भे ता जलणमुहे पविसामी कयपइन्नो सो ॥१०४॥ पत्तो रायगिहपुरे ठिओ य दिवसाणिकइवयाणि तहिं । अप्पसमागाराओ दो गणियादारिया घेत्तुं ।।१०५॥ पत्तो उजेणीए .पडिगाहियवणियवयणनेवच्छो। पारद्धमपुवकयाणगाण निउणं च वाणिजं ॥१०६।। गिण्हइ रायपहोगाढमेगमाचारि| ममरिसारूढो । अन्नदियहम्मि ताओ गणिया धूयाओ नरवइणा ।।१०७।। दिवा अवलोयणसंठियाओ सविसेसगहियवेसाओ। निज्झाइओ य सुचिरं दिट्ठीहि विसालधवलाहि ।।१०८॥ अंजलि बंधो य कओ तश्चित्तागरिसमंतसारिच्छो ।
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