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________________ श्रीउपदे- शपदे ।१२८। KARAXXXXXX तोलिओ होइ । को मे कज्जारूढस्स अत्थि सामत्थसंजोगो ॥४॥ नियसामत्थपरिक्खाहेउं चलिया पभायसमयम्मि । 'पति'नियतणुमेत्तसहाया एगं देसंतरं सव्वे ॥५॥ पत्ता दिणद्धसमए एगम्मि पुरे अनायकुलसीला। ओइन्ना कत्थइ देव 'पुत्र'द्व० भवणट्टाणे अइपहाणे ॥६॥ कह अञ्ज भोयणं होहित्ति भणिराण सत्थवाहसुओ। अज मए भो भोयणमुप्पाइय देयमिइ भणइ ॥७॥ ठावित्तु तिन्निवि तहिं ठाणे णगरंतरं अहेगागी । पत्तो पुराणवणियस्स आवणे समुवइट्ठो य ॥८॥ तम्मि दिणे किल कस्सइ देवस्स महूसवो अह पयट्टो । लग्गो धूवविलेवणवासाईणं विणिमओ य ।।९।। जाहे सो | पुडियाणं बंधं काउं न पारए वणिओ। ताहे सत्थाहसुओ साहेज काउमाढत्तो ।।१०।। पत्ते भोयणकाले भणिओ वणिएण पाहुणो होहि । पडिभणियं तेण कहं एगागी होमि जं मज्झ ॥११॥ अण्णो तिण्णि वयंसा संति बहि, तो | भणाइ वाणियओ। आकारजंतु लहुं तेवि य ते निव्विसेसा मे ॥१२।। दिण्णं तेसिं भायणमइगउरवसारमायर काउं । लग्गं च पचरूवगमेसि किल भायणवयम्मि ।।१३।। बीयदिणे सेट्रिसूओ भायणदाणे पइण्णमह काउं । निजाओ साहग्गियजणेसु सिररयणसारिच्छा ॥१४।। पत्तो गणियावाडगमज्झट्टियपवरदेवकुलमेगं । उवविट्ठो तत्थ तया पेच्छण-16 ।।१२८॥ गखणो महं आसि ।।१५।। एगाए गणियाए धूया नवजोव्वणुब्भडा पुरिसं । कंपि त इच्छइ रमिओ नियसुभगत्तणमउम्मत्ता ॥१६।। सा तं दटुं अक्खित्तमाणसा पेच्छिओ समाढत्ता। सकडक्खखेवमइनिद्धमुद्धदिट्ठी पुणो पुणवि ॥१७॥ मुणिओ एस वइयरो गणियाए तो सतोसचित्ता सा। आमंतिय नियगेहं नेइ पणामई य सा धूयं ।।१८।। विहिओ चउण्हवि तओ भोयणतंबोलवत्थमाईओ। रूवगसयमोल्लोऽकिवणभावकलियाइ उवयारो ॥१९।। तइयदिणे
SR No.600268
Book TitleUpdeshpad Mahagranth Satik Part 01
Original Sutra AuthorJinendrasuri
Author
PublisherHarshpushpamrut Jain Granthmala
Publication Year1989
Total Pages438
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size8 MB
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