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________________ पुट्ठो य वच्छा ! सो कत्थ परपुरिसो? १३॥ भणिओ तेण इमेणं दिसाविभागेण तुरियतुरियं सो। गच्छंतो मे दिट्ठो मा मण्णसु अण्णहा ताय ! ।।१४।। परिकलिय नटुसिलं महिलं सिढिलायरो तओतीए। भरहो सब्भावपयंपणाइरहिओ तओ जाओ ।।१५।। पच्छायावपरिगया सा भासइ कुणसु वच्छ ! मा एवं । सो भणइ न मम लट्ठ वट्टसि, सा बेइ वट्टिस्सं ।।१६।। तह कुणसु जहा एसो तूह जणओ मज्झ आयरं कुणइ । पडिवन्नमिमं रोहेण सावि तह वट्टिउं ।।९५॥ लग्गा ।।१७।। तहे चेव रयणिमज्झे कयावि सत्तट्रिओ भणइ जणगं । सो एस एस पुरिसेा कहिति पुट्ठो य पिउणावि ॥१८॥ तो निययं चिय छायं दंसित्ता भणइ पेच्छह इमं ति । स विलक्खमणो जाओ पुच्छइ कि एरिसा सावि । ।।१९।। आमंति तेण भणिए अव्वो बालाण केरिसल्लावा । इय चितिऊण भरहो घणराओ तीइ संजाओ ॥२०॥ तो RI विसपयाणभीओ पिउणा सह रोहओ सया जिमइ । अह उज्जेणिमइगओ कयाइ जणएण सद्धि सा ॥२१॥ दिट्ठा न यरी तियचच्चरादेसोवसोहिया सव्वा । दिवसावसाणसमए गामाभिमुहं पडिनियत्ता ।।२२।। सिप्पानईइ पत्ता वालु* यपुलिणम्मि तो सुयं ठविउं । पम्हटगहणहेउ पुणोवि नयरिं गओ जणओ ।।२३।। तो रोहेण अइनिउणबुद्धिणा तम्मि वालुयापुलिणे । तियचच्चराइकलिया लिहिया नयरी सपायारा ॥२४।। अह जियसत्तू राया नयरीबाहि गओ IS पडिनियत्तो । पंसुभएणेगागी तुरयरूढो तहिं देसे ॥२५।।जावेइ तुरियवेगा भणिओ ता रोहगेण मा वच्च । पुरओ : किं न नियच्छसि रायउलं तुंगपासायं ।।२६।। कत्तो रायउलं इह जा भणइ नराहिबो तओ जाओ। सउणो अइभूरि-x गुणो सवियको तो निवो जाओ ।।२७।। तो रोहएण नगरी सवित्थरं तं च राउल कहियं । तुब्भं कत्थ निवासो भ XXXXXXXXXXXXXXXXXXX********
SR No.600268
Book TitleUpdeshpad Mahagranth Satik Part 01
Original Sutra AuthorJinendrasuri
Author
PublisherHarshpushpamrut Jain Granthmala
Publication Year1989
Total Pages438
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size8 MB
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