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परिक्खेवो जोतिसंच भाणियवं जहा जीवाभगमे जाव संयंमूरमणे । ॥ इति ।
एगूणवीसमं पाहुड सम्मत्तं ॥ १९ ॥ * * * * * . . . समुद्र वर्तलाकार है. यह ३२ लास योजनका चक्रवाल से चौडाइ में है, इस की परिधि ३९५२८४७. योनसे कुच्छ अधिक कही. इस में ४१२ चंद्र ४९२ सूर्य ४३२१६ ग्रह १३७७६ नक्षत्र. ३२१५१७ डाकेड ताराओं हैं. इस का सब कथन जीवशाभिगम सूत्र से स्वयंभूरपण समुद्र के अधिकार पर्यंत या 1. यह गुन्नी वा पाहुडा संपूर्ण हुवा.॥ ११ ॥
अनुवादक-बालब्रह्म चारी मुनि श्री अमोलक ऋषेनी
• प्रकाशक राजीवहादुर लाली सुखदेवसहायजी माला प्रमादबी
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