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________________ श्रीराजप्रश्नी मलयगिरी - या वृत्तिः ॥ ७५ ॥ Jain Education | * * * 本* 众安*本义交通 वत्तसहस्सपत्तकेसरफुल्लोव चियाओ छप्पयपरिभुज्ज माणकमलाओ अच्छविमलसलिलपुरणाओ अपेगइयाओ आसवोयगाओ अप्पेगइयाओ खोरोयगाओ अप्पेगइयाओ घओयगाओ अप्पेगइयाओ खीरोयगाओ अप्पेगइआओ खारोयगाओ अप्पेगतियातो उयगरसेण पण्णत्ताओ पासादीयाओ दरिसणिजाओ अभिरुवाओ पडिवाओ तासि णं वावीणं जाव बिलपंतीणं पत्तेयं २ चउहिसिंत्तारि तिसोपाणपडिवगा पण्णत्ता, तेसि णं तिसोपाणपडिख्वगाणं वन्नाओ, तोरणाणं झया छत्ता इछत्ता य पेयद्दा, तासु णं खुड्डाखुड्डियासु वावीसु जाव बिलपंतियासु तत्थ २ देसे बहवे उपायपदयगा नियइपव्वययगा जगइपव्वया दारुइज्जपवयगा दगमंडया दगणालगा द्गमंचगा उसड्डा खुड्डखुड्डगा अंदोलगा पवखंदोलगा सबरयणा मया अच्छा जाव पडिरूवा, तेसु णं उप्पायपसु जाव पक्खंदोलएसु बहूई हंसासणाई कोचासणाई गरुलासणाई उण्णयासणाई पणयासाई दीहासणाई पवखासणाई भद्दासणाईं उसभासणाई सीहासणाई पउमासणाई दिसासोवत्थियाई सहरयणामयाई अच्छाई जाव पडिख्वाइँ, तेसु णं वणसंदेसु तत्थ तत्थ तहिं तहिं देसे देसे बहवे आलियघरगा मालियघरगा कयलिघरगा लयाघरगा अच्छणघरगा पिच्छणघरगा मंडणघरगा पसाहणघरगा गन्भघरगा मोहनघरगा सालघरगा जालघरगा चित्तघरगा कुसुमघरगा गंघघरगा आयंसघरगा सहरयणामया अच्छा जाव पडिरुवा, तेसु णं आलियघरगेसु जाव गंधव For Personal & Private Use Only F>**<>*%*46*469) *0*469) **** 459) **** सूर्याभवि मानवर्णन सू० ॥ ७५ ॥ w.jainelibrary.org
SR No.600237
Book TitleRajprashniyasutram
Original Sutra AuthorMalaygiri
Author
PublisherAgamoday Samiti
Publication Year1925
Total Pages302
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_rajprashniya
File Size6 MB
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