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________________ शोद्देशकप्रमाणस्य जीवा १ य लेस्स व्याख्या॥ अथ षडूविंशतितमं शतकम् ॥ २६ शतके प्रज्ञप्तिः उद्देशः१ अभयदेवी- व्याख्यातं पञ्चविंशतितमं शतम् , अथ षड्विंशतितममारभ्यते, अस्य चायमभिसबन्धः-अनन्तरशते नारकादिजी- जीवादीना या वृत्तिः२ वानामुत्पत्तिरभिहिता सा च कर्मबन्धपूर्विकेतिषड्विंशतितमशते मोहकर्मबन्धोऽपि विचार्यते इत्येवंसम्बन्धस्यास्यैकाद- | पापबन्धा॥९२८॥ | शोदेशकप्रमाणस्य प्रत्युद्देशकं द्वारनिरूपणाय तावद्गाथामाह | दिसू __ नमो सुयदेवयाए भगवईए । जीवा १ य लेस्स २ पक्खिय ३ दिट्ठी ४ अन्नाण ५ नाण ६ सन्नाओ७।। ८१-८११ वेय ८ कसाए ९उवओग १० जोग ११ एक्कारवि ठाणा ॥१॥ तेणं कालेणं तेणं समएणं रायगिहे जाव एवं वयासी-जीवे णं भंते! पावं कम्मं किं बंधी बंधइ बंधिस्सइ १बंधी बंधइ ण बंधिस्सइ २ बंधी न बंधइ5 ६ बंधिस्सइ ३ बंधी न बंधइ न बंधिस्सइ ४१, गोयमा! अत्थेगतिए बंधी बंधइ बंधिस्सइ १ अत्थेगतिए बंधी |बंधइ ण बंधिस्सइ २ अत्थेगतिए बंधी ण बंधइ बंधिस्सइ ३ अत्थेगतिए बंधी ण बंधइ ण बंधिस्सइ४-१॥ |सलेस्से णं भंते ! जीवे पावं कम्मं किं बंधी बंधा बंधिस्सइ १ बंधी बंधइण बंधिस्सइ ? पुच्छा, गोयमा! अत्थे| गतिए बंधी बंधइ बंधिस्सह १ अत्थेगतिए एवं चउभंगो। कण्हलेसे णं भंते ! जीवे पावं कम्मं किं बंधी पुच्छा, | गोयमा! अत्थेगतिए बंधी बंधा बंधिस्सइ अस्थेगतिए बंधी बंधन बंधिस्सइ एवं जाव पम्हलेसे सवत्थ ॥९२८॥ | पढमवितियभंगा, मुक्कलेस्से जहा सलेस्से तहेव चउभंगो। अलेस्से णं भंते! जीवे पावं कम्म किं बंधी पुच्छा, HISRUSAGARRAHA तेणं कालेणं तेण समाधी न बंधइ || माह ण बंधिस्सा २ अइन बंधिस्सइ ४?, गोया वधिस्सइ १ बंधी बंधणं समएणं रायगिहे जाओ। Jain Education International For Personal & Private Use Only www.jainelibrary.org
SR No.600226
Book TitleBhagwati sutram Part 03
Original Sutra AuthorAbhaydevsuri
Author
PublisherAgamoday Samiti
Publication Year1921
Total Pages654
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_bhagwati
File Size13 MB
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