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________________ त्ति स्कन्धरूपाः पुद्गलाः पुद्गलान्तरसम्पर्कादुपचिता भवन्ति 'अवचिज्जति'त्ति स्कन्धरूपा एव प्रदेशविचटनेनापचीनयन्ते । द्रव्याधिकारादेवेदमाह जीवे णं भंते ! जाई दवाई ओरालियसरीरत्ताए गेण्हइ ताई किं ठियाई गेण्हइ अठियाई गेण्हइ !, गोयमा ! ठियाइंपि गेण्हइ अठियाइंपि गेण्हइ, ताई भंते ! किं दवओ गेण्हइ खेत्तओ गेण्हइ कालओ गेण्हइ भावओ गेण्हइ ?, गोयमा ! दवओवि गेण्हइ खेत्तओवि गेण्हइ कालओवि गेण्हा भावओवि गेण्हइ ताई दवओ अणंतपएसियाई दवाई खेत्तओ असंखेजपएसोगाढाइं एवं जहा पन्नवणाए पढमे आहारुद्देसए जाव निवाघाएणं छद्दिसिं वाघायं पडुच सिय तिदिसिं सिय चउदिसिं सिय पंचदिसिं ॥ जीवे णं भंते ! जाई दवाइं वेउवियसरीरत्ताए गेहइ ताई किं ठियाइं गे• अठियाई गे०१, एवं चेव नवरं नियम छद्दिसिं एवं आहारगसरीरत्ताएवि ॥ जीवे णं भंते ! जाई दवाइं तेयगसरीरत्साए गिण्हा पुच्छा, गोयमा ! ठियाई गेण्हइ नो अठियाई गेण्हइ सेसं जहा ओरालियसरीरस्स कम्मगसरीरे एवं चेव एवं जाव भावओवि गिण्हइ, जाई दवाई दवओ गे० ताई किं एगपएसियाइं गेण्हइ दुपएसियाई गेण्हइ ? एवं जहा भासापदे जाव अणुपुश्विं गेनो अणाणुपुरि गेण्हइ, ताई भंते ! कतिदिसिं गेण्हइ ?, गोयमा ! निवाघाएणं जहा ओरालियस्स ॥ जीवे णं भंते ! जाइं दवाइं सोइंदियत्ताए गे० जहा वेउवियसरीरं एवं जावर जिभिदियत्ताए फासिंदियत्ताए जहा ओरालियसरीरं मणजोगत्ताए जहा कम्मगसरीरं नवरं नियम Jain Education International For Personal & Private Use Only www.jainelibrary.org
SR No.600226
Book TitleBhagwati sutram Part 03
Original Sutra AuthorAbhaydevsuri
Author
PublisherAgamoday Samiti
Publication Year1921
Total Pages654
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_bhagwati
File Size13 MB
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