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| यत्ताए उववज्जित्तए एवं जहा पुढविकाइओ तहा आउकाइओवि सबकप्पेसु जाव ईसिपम्भाराए तहेव उववाएयचो एवं जहा रयणप्पभाआउकाइओ उववाइओ तहा जाव अहेसत्तमापुढविआउकाइओ उववाएयचो जाव ईसिपम्भाराए, सेवं भंते ! २॥ (सूत्रं ६०६)॥१७-८॥ आउकाइए णं भंते ! सोहम्मे कप्पेसमोहए समोह. जे भविए इमीसे रयणप्पभाए पुढवीए घणोदधिवलएसु आउकाइयत्ताए उववजित्तए से णं भंते ! सेसं तं चेव एवं जाव अहेसत्तमाए जहा सोहम्मआउक्काइओ एवं जाव ईसिपब्भाराआउक्काइओ जाव अहेसत्तमाए उववाएयवो, सेवं भंते !२॥ (सूत्रं ६०७)॥ १७-९॥ वाउकाइए णं भंते ! इमीसे रयणप्पभाए जाव जे भविए सोहम्मे कम्मे वाउक्काइयत्ताए उवव जित्तए से णं जहा पुढविकाइओ तहा वांउकाइओवि नवरं वाउक्काइयाणं चत्तारि समुग्घाया पं०, तं०-वेदणासमुग्घाए जाव वेउवियसमुग्याए, मारणतियसमुग्धाएणं समोहणमाणे देसेण वा समो० सेसं तं चेव जाव अहेसत्तमाए समोहओ ईसिपब्भाराए उववाएयघो, सेवं भंते !२॥ (सूत्रं ६०८)॥ १७-१०॥ वाक्काइए णं भंते ! सोहम्मे कप्पे समोहए स०२ जे भविए इमीसे रयणप्पभाए पुढवीए घणवाए तणुवाए घणवायवलएसु तणुवायवलएसु वाउक्काइयत्ताए उवयजेत्तए से णं भंते ! सेसं तं चेव एवं जहा सोहम्मे वाउकाइओ सत्तसुवि पुढवीसु उववाइओ एवं जाव ईसिपम्भाराए वाउक्काइओ अहेसत्तमाए जाव उववाएयचो, सेवं भंते ! २॥ (सूत्रं ६०९) ॥१७-११॥ एगिदियाणं भंते ! सच्चे समाहरा सवे समसरीरा एवं जहा पढमसए बितियउद्देसए पुढविक्काइयाणं वत्त
SHAHISHAHARA AISHAHIRANA
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