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________________ स्तवन ही ठाम, सो० अ०॥६॥ माता वामा धाय पिता जमु, श्रीअश्वसेन नरेश। जनमपुरी वणारसी, धन धन काशीनो देश, सो० अ० ॥७॥ संवत सतरेशे बावीसें, बदि वैशाख वखाण । आटम दिन भले भावशू, मारी जात्रा चढी परिमाण, सो. अ०॥८॥ सानिध्यकारी विघ्न निवारी, पर उपगारी पास ॥ 'श्रीजिनचंद्र' हारतां, मोरी सफल फली सह आश, सो० अ०॥९॥ मौन समवसरण बेठा भगवंत, धरम प्रकाशे श्री अरिहंत। बार परपदा बेठी जुडी, मिगशिर शुदि इग्यारस वडी| मट्रिनाथना | समवसर एकाद तीन कल्याण, जनम दीक्षा ने केवल ज्ञान। अर दीक्षा लीधी रूवडी॥ मि० ॥२॥ नमिने उपर्नु केवल ज्ञान, पांच कल्याणक शीका अति परधान । ए तिथिनी महिमा एवंडी ॥ मिः ।।३॥ पाच भरत ऐरवत इमहीज, पांच कल्याणक हवे तिमहीज । पंचासनी संख्या परगडी ॥ मिः॥४॥ अतीत अनागत गिणतां एम, दोहशें कल्याणकथाये सेम ।।कुण तिथि छे ए तिथि जेवडी ।। मि० ॥५॥ 5 अनंत चोवीशी एण परे गिणो, लाभ अनंत उपवासांतणो। ए तिथि सह तिथि शिर राखडी || मि० ॥६॥ मौनपणे रह्या श्री मल्लिनाथ, एक दिवस संयम व्रत साथ । मौन तणी प्रवृत्ति इम पडी ॥ मि० ॥७॥ अठ पुहरी पोसो लीजिये, चोविहार विधिमुं कीजिये। पण परमाद न कीजे घडी ।। मि० ॥ ८॥ वरस इग्यारे कीजे उपवास, जावजीव पण अधिक उल्लास । ए तिथि मोक्ष. तणी पावडी।। मि० ॥२।। उजमणुं कीजे श्रीकार, ज्ञाननां उपगरण इग्यारे इग्यार करो काउरसंग्ग गुरु पाये पड़ी। मि० ॥१०॥देहरे स्नात्र करीजे वली, पोथी पूजीजे मन रली। मुगतिपुरी कीजे देव डी मि॥११॥ मौन इग्यारस महोटुं पर्च,आराध्यां मुख लहिये सर्व व्रत पञ्चवखाण करो आखडी। मि०॥१२॥ जेसल शोल इचयाशी समे,कीधुं स्तवन सह मन गमे । 'समयमुंदर' कहे करोध्यावडी। मि०॥१३॥ वीरमुणो वीर ! सुणो मोरी वीनती कर जोडी हो कहुं मननी वात। बालकनी परे वीनवु,मोरा सामी हो तुमे त्रिभुवन तात ।वी। तुम दरिसण मोरीवी विण हुँ भन्यो,भव माहे हो सामी ! समुद्र मझार । दुक्ख अनंता में सह्या,ते कहितां हो किम आवे पाररावीपर उपकारी तूं प्रभु ! दुःख स्तवन 155555555555 |१२३॥ Jain ducation n ational For Personal Private Use Only 4 hdbrary.org
SR No.600211
Book TitlePanch Pratikraman Sutra
Original Sutra AuthorSiddhachal Kalyan Bhuvan tatha Surat
Author
PublisherSiddhachal Kalyan Bhuvan tatha SUrat Nava Upasarana Aradhak
Publication Year1933
Total Pages192
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size18 MB
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