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________________ रायपसेणइयं । ॥२४९॥ अप्पेगतिया रहघणघणाइयं करेंति, अप्पेगतिया हयहेसिय-हत्थिगुलगुलाइय-रघणघणाइयं करेंति, अप्पेगतिया उच्छेलेंति, अप्पेगतिया पोच्छेलेंति, अप्पेगतिया उक्किट्टियं करेंति, अ० उच्छलेंति पोच्छलेंति, अप्पेगतिया तिन्नि वि, अप्पेगतिया उवैयंति, अप्पेगतिया उप्पयंति, अप्पेगतिया परिवयंति, अप्पेगइया तिन्निवि, अप्पेग इया सीहनायंति, अप्पेगतिया दद्दरयं करेंति, अप्पेगतिया भूमिचवेडं दलयंति, अप्पे० तिन्नि वि, अप्पेगतिया गजंति, अप्पेगतिया विज्जुयायंति, अप्पेगइया वासं वासंति, अप्पेगतिया तिन्निवि करेंति, अप्पेगतिया ५ जलंत, अप्पेगतिया वंति, अप्पेगतिया पैतवेंति, अप्पेगतिया तिन्नि वि, अप्पेगतिया हकारेंति, अप्पेगतिया थुक्कारेंति, अप्पेगतिया धक्कारेंति, अप्पेगतिया साइं साइं नामाइं साति, अप्पेगतिया चत्तारि वि, अप्पेगइया देवा देवसन्निवायं करेंति, अप्पेगतिया देवुज्जोयं करेंति, अप्पेगइया देवुकलियं करेंति, अप्पेगइया देवा कहकहगं करेंति, अप्पेगतिया देवा दुहंदुहगं करेंति, अप्पेगतिया चेलुक्खेवं करेंति, अप्पेगइया देवसन्निवायं देवुजोयं देवुक्कलियं देवकहकहगं देवदुहदुहर्ग चेलुक्खेवं करेंति, अप्पेगतिया उप्पलहत्थगया जाव सयसहस्सपत्तहत्थस्फोटयन्ति भूम्यादिकमिति गम्यते, २८ उच्छलयन्ति २९ प्रोच्छलयन्ति ३० अवपतन्ति ३१ उत्पतन्ति ३२ परिपतन्ति-तिर्यक् निपतन्तीत्यर्थः ३३ ज्वालामालाकुला भवन्ति ३४तप्ता भवन्ति ३५ प्रतप्ता भवन्ति ३६महता शब्देन थूत्कुर्वन्ति ३७ देवानां वातस्येवोत्कलिका देवोत्कलिका तां कुर्वन्ति, ३८ प्राकृतानां देवानां प्रमोदभरवशतः स्वेच्छावचनोलकोलाहलो देवकहकहस्तं कुर्वन्ति । ३९ 'दुहदुहगम्' इत्यनुकरणमेतत् । Jain Education Intellano For Private & Personel Use Only Diww.limelibrary.org
SR No.600148
Book TitleRaipaseniya Suttam
Original Sutra AuthorN/A
AuthorBechardas Doshi
PublisherGurjar Granthratna Karyalay
Publication Year1938
Total Pages536
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_rajprashniya
File Size11 MB
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