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________________ सू०३००-३०१ श्रीस्थानाङ्ग सूत्रदीपिका वृत्तिः । ॥३२२॥ 00000000000000000000000000000000000000001 स्वार्थिको द्रष्टव्यः । अनन्तरं सर्वप्ररूपित तत्प्रस्तावात सर्वमनुष्यक्षेत्रपर्यन्तवर्तिनि पर्वते सर्वासु तिर्यगदिक्षु कूटादि प्ररूपयन्नाह - माणुसुत्तरस्स ण पब्वयस्स चउद्दिसिं चत्तारि कूडा प० त०-रयणे रयणुच्चए सव्वरयणे रयणसंचए (सू० ३००) । जम्बूद्दीवे दीवे भरहेरवएसु वासेसु तीयाए उस्सप्पिणीप सुसमसुसमाए समाप चत्तारि सागरोवमकोडाकोडीओ कालो होत्था, जम्बूद्दीवे दीवे भरहेरवपसु वासेसु इमीसे ओसप्पिणीप सुसमसुसमाए समाए चत्तारि सागरोवमकोडाकोडीओ कालो होत्था, जंबूहीवे दीवे भरहेरवएसु वासेसु आगमिस्साए उस्सप्पिणीए सुसमसुसमाए समाए चत्तारि सागरोवमकोडाकोडीओ कालो भविस्सइ (सू० ३०९) । जवूद्दीवे दीवे देवकुरुउत्तरकुरुवज्जाओ चत्तारि अकम्मभूमीओ पं० त-हेमवए हेरन्नवए हरिवासे रम्मगवासे, तत्थ ण चत्तारि वट्टवेयडूढा पव्यया प० त०-सहावती वियडावती गंधावई मालव'तपरियाए, पत्थ ण चत्तारि देवा महड्ढिया जाव पलिओवहिनीया परियसंति, त-साती पभासे अरुणे पउमे, जवूद्दीवे दीवे महाविदेहे वासे चउब्बिहे पन्नत्ते, त-पुब्वविदेहे अवरविदेह देवकुरा उत्तरकुरा, सब्वेवि ण णिसढणीलवतवासहरपब्बया धत्तारि जोयणसयाइ उइट उच्चत्तेण चजारि गाज्यसयाइ उबेहेण पन्नत्ता, जबूद्दीवे दीवे मंदरस्स ण पव्वयस्स पुरथिमेण सीयाए महानदीए उत्तरे कूले चत्तारि वक्खारपव्वया पंत-चित्तकूडे पम्हकूडे णलिणकूडे एगसेले, जबू० मंदर० पुर० सीताए महाणईएदाहिणेण (दाहिणकूले) चत्तारि वक्खारपब्वया ५० त०-तिकूडे वेसमणकूडे अंजणे मातंजणे, जंवू० मंदर० पञ्चत्थिमेण' सीतोदाप महानईए दाहिणे कूले चत्तारि वक्खारपब्वया ५० त०-अकावती पम्हावती आसीविसे सुहावहे, जबू० मंदर० पच्च० सीतोदाए महानईए उत्तरे कृले चत्तारि वक्खारपब्वया पं० त-चंदपव्वए सूरपब्वए ॥३२२॥ 20600000 Jan Education For Private & Fersonal use only www.jainelibrary.org
SR No.600142
Book TitleSthanang Sutra Dipika Vrutti
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVimalharsh Gani, Mitranandvijay
PublisherDevchand Lalbhai Pustakoddhar Fund
Publication Year1974
Total Pages454
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_sthanang
File Size23 MB
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