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________________ Jain Education national rasar नरवइदंडनाह सामंतमंतिपमुहजणे । पडिवोहिऊण पुणरवि कोसंबिं आगओ सामी ॥ ७ ॥ तहियं समोसढसा चरिमाए पोरिसीऍ जयगुरुणो । विम्हइयजीवलोयाइं फालिआई विमाणाई ॥ ८ ॥ साहावियाई पचखदिस्समाणाणि आरुहेऊण । ओयरिया भत्तीऍ वंदणवडियाए ससिसूरा ॥ ९ ॥ सिं विमाणनिम्मलमऊहनिवहप्पयासिए गयणे । जायं निसिंपि लोगो अवियाणंतो सुणइ धम्मं ॥ १० ॥ नवरं नाउं समयं चंदणवाला पवत्तिणी नमिउं । सामिं समणीहिं समं निययावासं गया सहसा ॥ ११ ॥ सा पुण मिगावई जिणकहाए वक्खित्तमाणसा धणियं । एगागिणी चिय ठिया दिणंति काऊण ओसरणे ॥ १२॥ बोलणे खणमेचे साई विमाणाई आरुहित्ताणं । ससिसूरेसु गएसु वियंभिए रयणितिमिरभरे ॥ १३ ॥ समणीओ समीवंमी अपेच्छमाणी य सा महासत्ता । पगया पडिस्सयंमी पवत्तिणीए य तो भणिया ॥ १४ ॥ तुम्हारिसीण सुकुलुग्गयाण जुज्जइ किमेवमायरिडं ? । एगागिणीवि य तुमं जंसि ठिया एत्तियं रयणिं ॥ १५ ॥ पडिवज्जिय तयणं भुज्जो भुजो सदुच्चरीयाई । निंदंतीए तीए उप्पन्नं केवलं नाणं ॥ १६ ॥ अह - पयलायंतीए पवत्तिणीऍ सप्पं पलोइयं इंतं । संथारगंमि हत्थो ठविओ तीए धराहिंतो ॥ १७ ॥ निदावगमे पुच्छा अहिकहणं नागवुज्झणऽणुतावो । निहयघणघाइकम्मा पवत्तिणी केवलं पत्ता ॥ १८ ॥ इओ य-उप्पन्नसंसओ पढमगणहरो पणभिउं जिणं भणइ । किमवट्ठियावि भावा विवरीयत्तं पवज्जंति ? ॥ १९ ॥ For Private & Personal Use Only ainelibrary.org
SR No.600114
Book TitleMahavir Charitram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorGunchandra
PublisherDevchand Lalbhai Pustakoddhar Fund
Publication Year1929
Total Pages704
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size15 MB
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