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________________ Jain Education सीए ण हवइ एसा सामन्ना, ता फलियध्वमियाणिं अम्ह मणोरहपायवेगंति चिंतिऊण एवं थोउमारद्वाईअजं विडियनिविडदुहनिगड पविहाडिय [ अज परपवरसुगर ] मंदिरदुवाराई । अजं चिय करकमलि लीण, सुहाई संसारसाराई ॥ १ ॥ अजं चि तिहुयण सिरीहिं, अम्हि पलोइय नाह ! । जं तुह लोयणपहि गयउ नासियदोसपवाह ॥ २ ॥ अहह अम्हेहिं तिक्खदुक्खोहसिहितत्तगत्तिहिं, कह नाह ! तुम्ह पयमंडवंतरि । नहनिवहनिम्मलरयणकिरणजालसंछाइयंवरि ॥ ३ ॥ संपल निवासु फुडुमरुपहिएहिं व देव ! । जं तुह दिट्ठ मुहकमलु, खालियकम्मवलेव ॥ ४ ॥ एवं च भत्तिसाराहिं सुसिलिठ्ठाहिं मणाणंददायिणीहिं गिराहिं हरिसुप्फुल्ललोयणाहिं थोऊण पुणो पुणो निडालतडताडियधरणिवट्टाई भणिउमाढत्ताई - देव ! जइ एतो अम्ह दारगो वा दारिगा वा तुम्ह पसाएण होजा ता इमं तुह भवणं कणथकलसकलियसिहरं थूरथंभाभिरामविसालसालापरिक्खित्तं कविसीसयस ओवसोहियं पवरपागारसंपरिग्गहियं सुसिलिठावियसालभंजिया सुंदरगोयराणुगयं कारवेमो, सयावि तुम्ह भत्तिपरायणाणि य होमो, अणवरयं पूयामहिमं च विरएमोत्ति भणिऊण उज्जाणकीलं काऊण गयाणि सगिहं । अह तेसिं भत्तिपगरि| सागरिसियहिययाए अहासन्निहियवाणमंतरीए देवयाए अणुभावेण आहूओ भद्दाए सेट्टिणीए गन्भो, समुत्पन्नो For Private & Personal Use Only Mainelibrary.org
SR No.600114
Book TitleMahavir Charitram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorGunchandra
PublisherDevchand Lalbhai Pustakoddhar Fund
Publication Year1929
Total Pages704
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size15 MB
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