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________________ वेयण १ कसाय २ मरणे ३ वेउविय ४ तेयए य ५ आहारे ६ । केवलियसमुग्घाए ७ सत्त इमे हुंति मणुयाणं ॥११॥ एगिंदीणं केवलिआहारगवजिया इमे पंच । पंचावि अवेउवा विगलासन्नीण चत्तारि ॥ १२॥ केवलियसमुग्घाओ पढमे समयंमि विरयए दंडं । बीए पुणो कवाडं मंथाणं कुणइ तइयंमि ॥ १३ ॥ लोयं भरइ चउत्थे पंचमए अंतराई संहरइ । से छढे पुण मंथाणं हरइ कवाडंपि सत्तमए ॥ १४ ॥ अट्ठमए दंडपि हु उरलंगो पढमचरमसमएसुं । सत्तमछट्ठबिइजेसु होइ ओरालमिस्सेसो ॥१५॥ कम्मणसरीरजोई चउत्थए पंचमे तइज्जे य । जं होइ अणाहारो सो तंमि तिगेऽवि समयाणं ॥१६॥२३१ द्वारम् ॥ | आहार १ सरीरि २ दिय ३ पजत्ती ४ आणपाण ४ भास ५ मणे ६। चत्तारि पंच छप्पिय एगिदियविगलसन्नीणं ॥१७॥ पढमा समयपमाणा सेसा अंतोमुहुत्तिया य कमा।समगंपि हुंति नवरं पंचम छट्ठा य अमराणं ॥१८॥२३२ द्वारम् ॥ विग्गहगइमावन्ना केवलिणो समोहया अजोगी य । सिद्धा य अणाहारा सेसा आहारगा जीवा ॥१९॥ २३३ द्वारम् ॥ | इह १ परलोया २ ऽऽयाणा ३ मकम्ह ४ आजीव ५ मरण ६ मसिलोए ७। सत्त भयहाणाई इमाई सिद्धंतभणिहायाई॥२०॥ २३४ द्वारम् ॥ I हीलिय १ खिंसिय २ फरसा ३ अलिआ ४ तह गारहत्थिया भासा ५ । छट्ठी पुण उवसंताहिगरणउल्लाससंजणणी ६ ॥२१॥ २३५ द्वारम् ॥ दुविहा २ अट्ठविहा वा ८ बत्तीसविहा य ३२ सत्तपणतीसा ७३५ । सोलस य सहस्स भवे अट्ठ सयट्ठोत्तरा १६८०८ SSC+++MAGN40059 Jain Education International For Private & Personel Use Only www.jainelibrary.org
SR No.600108
Book TitlePravachan Saroddhar Uttararddh
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNemichandrasuri
PublisherDevchand Lalbhai Pustakoddhar Fund
Publication Year1926
Total Pages628
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size13 MB
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