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________________ सूत्रे OCARECHNO प्रवचन । उहाहतिरियसिद्धाणं । तह एक्कसमयसिद्धाण ते य पन्नरसभेएहिं ॥ १०॥ अवगाहणाय सिद्धा उक्किट्ठजहन्नमज्झिमाए द्वारगाथाः य। गिहिलिंगअन्नलिंगस्सलिंगसिद्धाणे संखा उ ॥ ११॥ बत्तीसाई सिझंति अविरयं जाव अट्ठअहियसयं । अट्ठसमएहिं । द एक्केणं जावेकसमयंतं ॥ १२॥ थीवेए पुंवेए नपुंसए सिझमाणपरिसंखा । सिद्धाणं संठीणं अवठिइठाणं च सिद्धाणं ॥४६२॥ ॥१३॥ अवगाहणा य तेसि उक्कोसे मज्झिमा जहन्नी य । नामाइ चउण्हपि हु सासयजिणाहपडिमाणं ॥ १४॥ उव-1 गरणाणं संखा जिणांण थविराण साहुणीणं च । जिणकप्पियाण संखा उक्किट्ठा एगवसहीए ॥ १५ ॥ छत्तीसं सूरिगुणा विणओ बावन्नभेयपंडिभिन्नो।चरणं करणं जंघाविजाचारणगमणसत्ती ॥ १६ ॥ परिहारविसुद्धि अहाँलंदा निजामयाण| अडयाला । पणवीस भावणाओ सुहाँउ असुहाउँ पणवीसं ॥ १७ ॥ संखा महङ्घयाणं किइकम्माण य दिणे तहा खित्ते ।। चारितणं संखा ठियकैप्पो अठियकैप्पो य ॥ १८ ॥ चेइये पुत्थय दंडय तणं चम्मै दुसाइ पंच पत्तेयं । पंच अवग्गहभेया परीसहा मंडली सत्त ॥ १९ ॥ दैसठाणववच्छेओ खंगस्सेढी य उँवसमस्सेढी । थंडिल्लाण सहस्सो अहिओ चैउसहिय वीसाए ॥ २०॥ पुवाणं नामाई पयसंखासंजुयाई उदसवि । निग्गंथा सैमणावि य पत्तेयं पंचं पंचेव ॥ २१॥ गासेसप्रणोण पणगं पिंडे पाणे य एसौँ सत्त । भिक्खारिया वीहीणमट्ठगं पायछित्ताणं ॥ २२॥ सोमायारी ओहंमि पयविभी गंमि तह य देसहा उ (चक्कवालंमि)। निग्गंधत्तं जीवस्स पंचवाराओ भंववासे ॥ २३ ॥ साहुविहारसरूवं अप्पडिबद्धो य सो विहेयव्यो । जायाअंजायकप्पो परिठवणुच्चारकरणदिसा ॥ २४ ॥ अट्ठारस पुरिसेसुं वीसं इत्थीसु दस 'नपुंसेसुं । ॥४६२॥ पवावणाअणरिहा तह वियलंगसरूंवा य ॥ २५ ॥ जंमुल्लं जईकप्पं वत्थं सेजायरेस्स पिंडो य । जत्तिय सुत्ते सम्म जह OGORicon.de Jan Education Internal For Private Personel Use Only www.ainelibrary.org
SR No.600108
Book TitlePravachan Saroddhar Uttararddh
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNemichandrasuri
PublisherDevchand Lalbhai Pustakoddhar Fund
Publication Year1926
Total Pages628
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size13 MB
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