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________________ नवपद बृह. धणसत्थवाहो वाहणधणधन्नसंपयाकलिओ। भद्दा य तस्स भजा दासी य चिलाइया तसिं॥४६॥अण्णया य-सो सम्यक्त्वोसम्यक्त्वा-IN त्पादेचित्राजण्णदेवदेवा तत्तो चविऊण आउयखयंमि । चेडीऍ तीऍ पुत्तो दुगुंछदोसेण संजाओ ॥४७॥ कयवयदियहेहिं तओ तिपुत्रज्ञात चिलाइपुत्तोत्ति से कयं नाम। संवडिओ कमेणं इओ य भज्जावि से चविउं॥ ४८ ॥ । पंचण्ह सुयाणुवरिं जाया दुहियत्तणेण भदाए । उचियसमयंमि अह सुसमत्ति तीसे कयं नामं ॥४९॥ जुम्मं पच्छा बालग्गाहो चिलाइपुत्तो पिऊहि आणत्तो । दिल्लिं दिलियाएविह तीऍ समं कुणइ सोडणालिं॥ ५० ॥ अह अण्णया य दिछो, पिउणा से नीणिओ य गेहाओ। भमडंतो य कमेणं संपत्तो सीहाहपल्लिं ॥ ५१॥ पल्लिवइसीहनायं समल्लिऊणं ठिओ या सो चंडो । कूरो दढप्पहारी, नित्तिसो सव्वकम्मेसु ॥ ५९॥ तविहगुणेहि पल्लीवइस्स कालेण बहुमओ जाओ। होइच्चिय अहव इमं, सरिसा सरिसेसु रज्जंति ॥ ५३ ॥ उक्तश्च -" मृगा मृगैः सङ्गमनुवजन्ति, गावश्च गोभिः । स्तुरगास्तुरङ्गैः । मूर्खाश्च मूखैः सुधियः सुधीभिः, समानशीलव्यसनेषु सख्यम् ॥ ५४ ॥” वच्चंतेसु दिणेसुं पल्लिवई अण्णया मओ तत्थ । नियविक्कमेण सो चेव चोरलेणावई जाओ॥ ५५ ॥ इओ य आऊरियलायण्णा नीसेस कलाकलावसंपुण्णा । सा संसुमाऽवि जाया रूबाइगुणेहि विक्खाया ॥ ५६ ।। सिट्ठा य तस्स पुरओ, रायगिहागं Jain Educatan inte For Private & Personel Use Only srww.jainelibrary.org
SR No.600105
Book TitleNavpad Prakaranam
Original Sutra AuthorYashovijay Upadhyay
Author
PublisherDevchand Lalbhai Pustakoddhar Fund
Publication Year1927
Total Pages710
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size14 MB
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