SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 485
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ विलंबितं णविहिं उवदंसेंति अप्पेगइया देवा इतविलंबितंणाम णविधि उवदंति अप्पेगतिया देवा अंचियं णविधि उवदंसेंति अप्पेगतिया देवा रिभितं णविधि उवदंसेंति अ० अंचितरिभितं णाम दिव्वं णविधि उवदंसेंति अप्पेगतिया देवा आरभडं णविधि उवदंति अप्पेगतिया देवा असोलं णविधि उचईसनि अप्पेगनिया देवा आरभडभसोलं णाम दिव्वं णविधि उवदंति अप्पेशतिया देवा उप्पायणिवायपधुसं संकुचियपसारियं रियारियं भंतसंभंतं णाम दिवं णविधिं उवदंसेंति अप्पेगनिया देवा चरविधं वातियं बादंति, तंजहाततं विततं घणं सुसिर, अप्पेगतिया देवा च उत्रिनं गेयं गातंति, तंजहा-उक्खिसयं पवत्तयं मंदायं रोइदावसाणं, अप्पेगतिया देश च उविध अभिणयं अभिणयंति, जहा-दिढतियं पाडंतियं सामन्तोवणिवातियं लोगमज्झावसाणियं, अपपेगतिया देवा पीगंति अप्पेगतिया देवा बुकारेंति अप्पेगतिया देश तंडवेंति अप्पे० लासंनि अप्पेगतिया देवा पीणंति वुकारेति तंडवेंनि लासंति अप्पेगतिया देवा वुक्कारति अप्पेगतिया देवा अपफोडंति अपेगतिया देवा वग्गंनि अप्पेगतिया देवा तिवतिं छिदंति अप्पेगतिया देवा अप्फोडेंति वगंति तिवति छिदेति अप्पेगतिथा देवा हतहेसियं करेंति अप्पेगतिया देवा हथिगुलगुलाइयं करेंति अप्पेगतिया देवा रहघणघणातिरं करति अप्पेगतिया देवा हयहेमियं करंति इत्थिगुलगुलाइयं करेंति रघणघणाइयं करेंति - जी०स०४२ Jain Education For Private Personel Use Only jainelibrary.org
SR No.600089
Book TitleJivajivabhigamopanga Sutra
Original Sutra AuthorChaturdash Purvadhar
AuthorMalaygiri
PublisherDevchand Lalbhai Pustakoddhar Fund
Publication Year1919
Total Pages938
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_jivajivabhigam
File Size20 MB
JainGPT.orgInstagram
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy