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________________ श्रीजम्बू द्वीपशान्तिचन्द्रीया वृत्तिः ॥४९३॥ अवक्षस्कारे करणाधिकारः सू. १५३ गो.! सत्त करणा चरा चत्तारि करणा थिरा पण्णत्ता, तंजहा-बवं बालवं कोलवं विविलोअणं गरादि वणिज विट्ठी, एते नं सत्त करणा चरा, चत्तारि करणा थिरा पं०, तं०-सउणी चउप्पयं णागं किंत्थुग्धं, एते णं चत्तारि करणा थिरा पण्णत्ता, एते णं भन्ते! चरा थिरा वा कया भवन्ति !, गोअमा! सुक्कपक्खस्स पडिवाए राओ बवे करणे भवइ, बितियाए दिवा बालवे करणे भवइ, राओ कोलवे करणे भवइ, ततिआए दिवा थीविलोअणं करणं भवइ, राओ गराइ करणं भवइ, चउत्थीए दिवा वणिज राओ विट्ठी, पंचमीए दिवा बवं राओ बालवं, छट्ठीए दिवा कोलवं राओ थीविलोअणं, सत्तमीए दिवा गराइराओ वणिज अट्रमीए दिवा विठ्ठी राओ बवं नवमीए दिवा बालवं राओ कोलवं दसमीए दिवा थीविलोअणं राओ गराई एकारसीए दिवा वणिज राओ विठ्ठी बारसीए दिवा बवं राओ बालवं तेरसीए दिवा कोलवं राओ थीविलोअणं चउद्दसीए दिवा गरातिं करणं राओ वणिज पुण्णिमाए दिवा विट्ठीकरणं राओ बवं करणं भवइ, बहुलपक्खस्स पडिवाए दिवा बालवं राओ कोलवं बितिआए दिवा थीविलोअणं राओ गरादि ततिआए दिवा वणिज राओ विही चउत्थीए दिवा बवं राओ बालवं पंचमीए दिवा कोलवं राओ थीविलोअणं छट्ठीए दिवा गराई राओ वणिज्जं सत्तमीए दिवा विट्ठी राओ बवं अट्ठमीए दिवा बालबं राओ कोलवं णवमीए दिवा वीविलोअणं राओ गराई दसमीए दिवा वणिज राओ विट्ठी एक्कारसीए दिवा बवं राओ बालवं बारसीए दिवा कोलवं राओ . थीविलोअणं तेरसीए दिवा गराई राओ वणिज्जं चउद्दसीए दिवा विट्ठी राओ सउणी अमावासाए दिवा चउप्पयं राओ णार्ग सुक्लप खस्स पाडिवए दिवा कित्थुग्धं करणं भवइ (सूत्र १५३) - 'कति णं भन्ते !'इत्यादि, कति भदन्त ! करणानि प्रज्ञप्तानि?, गौतम! एकादश करणानि प्रज्ञप्तानि, तद्यथा-वं ४९३॥ Jain Education For Private Personel Use Only
SR No.600088
Book TitleJambudwip Pragnapati Namak Mupangam Part_2
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShantichandra Gani
PublisherDevchand Lalbhai Pustakoddhar Fund
Publication Year1920
Total Pages332
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_jambudwipapragnapti
File Size16 MB
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