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________________ आवश्यकनिर्युक्तेरव चूर्णिः । ॥ १३१ ॥ एकवीसाए सबलेहिं, बावीसाए परीसहेहि, तेवीसाए सूयगडज्झयणेहिं, चउवीसाए देवेहि, पंचवीसाए भावणाहिं, छव्वीसाए दसाकप्पववहाराणं उद्देसणकालेहि, सत्तावीसविहे अणगार- विंशतिः चरित्ते अट्ठावीसविहे आयारप्पकप्पे, एगणतीसाए पावसुयपसंगेहिं, तीसाए मोहणियठाणेहि, शवला एगतीसाए सिद्धाइगुणहिं, बत्तीसाए जोगसंगहेहिं ( सत्रम्) तंजह उ हत्थकम्मं कुछते मेहुणं च सेवंते। राई च भुंजमाणे आहाकम्मं च मुंजते ॥ १॥ तत्तो य रायपिंडं कीयं पामिच्च अभिइदं छेज्ज । भुजते सबले ऊ पञ्चक्खियऽभिक्ख जइ य ॥ २ ॥ छम्मासमंतरओ गणा गणं संकर्म करेंते य। मासभंतर तिण्णि य दगलेवा ऊ करेमाणो ॥ ३ ॥ मासभंतरओ वा माइठाणाई तिन्नि करेमाणे । पाणाइवाय उर्टि कुवंते मुसं वयंते य ॥४॥ गिण्हते य अदिण्णं आउट्टि तह अणंतरहियाए । पुढवीय ठाणसेजं निसिहियं वावि चेतेह ॥ ५ ॥ एवं ससणिद्वाए ससरक्खाचित्तमंतसिललेलं। कोलावासपट्टा कोलघुणा तेसि आवासो ॥६॥ संडसपाणसबीओ जाव उ संताणए भवे तहियं । ठाणा चेयमाणो सबले आउट्टियाए उ ॥ ७॥ आउट्टि मूलकंदे पुप्फे य फले बीयहरिए य । भुंजते सबलेए तहेव संवच्छरस्संतो ॥ ८॥ दस दगलेवे कुवं तह माइहाण दस य बरिस्संतो। आउट्टिय सी उदगं वग्धारियहत्यमत्ते य ॥ ९॥ दवीए भायणेण व दीयतं भत्तपाणं घेत्तूणं । भुंजह सबलो एसो इगवीसो होइ नायवो ॥ १०॥ इत्यादि गाथा दश, शवलचारित्रनिमित्तत्वास्करकीकरणादयः क्रियाविशेषाः शबला उच्यन्ते. तद्यथा-हस्तकर्म स्वयं IN॥ १३१ ॥ Jain Education in For Private Personal Use Only T ww.jainelibrary.org
SR No.600065
Book TitleAvashyaksutra Niryuktirev Curni Part_2
Original Sutra AuthorHaribhadrasuri, Gyansagarsuri, Bhadrabahuswami
Author
PublisherDevchand Lalbhai Pustakoddhar Fund
Publication Year1965
Total Pages338
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationManuscript & agam_aavashyak
File Size15 MB
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