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अनुयो० मलधा
वृत्तिः उपक्रमाधिक
रीया
॥१४५॥
SASAROSALMANGALSAROSAGACASS
णिरक्खिए य, एवं सव्वनक्खत्तेसु नामा भाणिअब्बा। एत्थं संगहणिगाहाओ-कित्तिअरोहिणिमिगसिरअदा य पुणव्वसू अ पुस्से अ। तत्तो अ अस्सिलेसा महा उ दो फग्गुणीओ अ॥१॥ हत्थो चित्ता साती विसाहा तह य होइ अणुराहा । जेट्टा मूला पुव्वासाढा तह उत्तरा चेव ॥ २ ॥ अभिई सवण धणिटा सतभिसदा दो अ होति भद्दवया । रेवई अस्सिणि भरणी एसा नक्खत्तपरिवाडी ॥३॥ से तं नक्खत्तनामे । से किं तं देवयाणामे ?, २ अग्गिदेवयाहिं जाए अग्गिए अग्गिदिपणे अग्गिसम्मे अग्गिधम्मे अग्गिदेवे अग्गिदासे अग्गिसेणे अग्गिरक्खिए एवं सव्वनक्खत्तदेवयानामा भाणिअव्वा । एत्थंपि संगहणिगाहाओ-अग्गिपयावइ सोमे रुद्दो अदिती विहस्सई सप्पे । पिति भग अज्जम सविआ तट्टा वाऊ अ इंदग्गी ॥१॥ मित्तो इंदो निरई आऊ विस्सो अ बंभ विण्हुआ। वसु वरुण अयविवद्धि पूसे आसे जमे चेव ॥ २ ॥ से तं देवयाणामे । से किं तं कुलनामे ?, २ उग्गे भोगे रायपणे खत्तिष
ROSASSASSASSASSASS
॥१४५॥
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