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कपित्थास्तिकतिन्दुकविल्वपनसदाडिममातुलिङ्गादीनां बहुबीजानां च तरूणाम् ; गुल्मानां नवमालिका-सेरिM यक-कोरण्टक--बन्धुजीवक-वाण-करवीर-सिन्दुवार-विचकिल-जाती-पथिकादीनाम् ; गुच्छानाम्न्ताको
कर्पासी-जपाऽऽढकी-तुलसी-कुस्तुम्भरी-पिप्पली-नील्यादीनाम् ; लतानाम् पद्मनागा-शोक-चम्पक-वासन्त्यतिमुक्तककुन्दलतादीनाम्। वल्लीनाम्=कुष्माण्डी-कालिङ्ग-त्रपुषी-तुम्बी-चालङ्कथेलुकी-पटोल्यादीनाम् ; तृणानाम्-श्वेतिकाकुशदर्भपर्वकार्जुनसुरभिकुरुबिन्दादीनां; वलयानाम्-तालतमालतकलीशालसरलाकेतकीकदलीकन्दल्यादीनाम्। हरितानाम्-तन्दुलीयकाधूयारुहबस्तुबदरकमारिपादिकाचिल्लीपालक्यादीनाम्। अड्डुराणाम्बीजात् सद्योजातानाम्।
कल्पमञ्जरी टीका
एकास्थिक-एक गुठली वाले-वृक्ष; गूलर, कपिस्थ (कवीठ-कैथ), अस्तिक, तिन्दुक, बिल्व, पनस, दाडिम, मातुलिंग (विजौरा) आदि बहुत बीज वाले वृक्ष; नवमालिका, सेरियक, कोरप्टक, बन्धुजीवक, वाण, करवीर, सिन्दुवार, वेला आदि गुल्मवृन्ताकी, कपास, जपा, आढकी, तुलसी, कुस्तुम्भरी, पिप्पली, नीली आदि गुच्छ; पद्मनाग, अशोक, चम्पा, वासन्ती, अतिमुक्तक, कुन्दलता आदि लताएँ; कुष्माण्डी (कद्दू), कालिंग (तरबूच), त्रपुषी (ककडी), तूंबी, वालुंकी (वालौर), एलुकी (आल), पटोली आदि बेलें; श्वेतिका, कुश, दर्भ, पर्वक, अजुन, सुरभि, कुरुविन्द आदि तृण (घास ); ताल, तमाल, तक्कली, शाल, सरला, केतकी, कदली, कंदली आदि वलय; तंदुलीयक, अधूयारूह, बस्तु (बथुआ), बदरक, मार्जारपादिका,
विगैरे मे बियामा-मे जी4nा वृक्ष, तथा भूस२, पित्य (48-32), भारत, तिन् मिEE, પનસ, દાડમ, માતુલિંગ ( વિજેરા) વિગેરે ઘણા બીજવાળા વૃક્ષ; તેમ જ નવમાલિકા સેરિયક, કરંટક, બધુજીવક पाय, ४२वीर सिन्दुवार, a आदि शुभ; वृन्ता, पास, पा, माजी, तुसी, सुस्तुमरी, पिसी, lal विशेरे शु२७; तथा पना, मो, या, वासन्ती, अतिभुत, दुसता विगेरे सताया; तथा भांजी () अलि (तरपूय) yी (195) तुगडी, पासार, माल, पटसी विगेरे वाम तथा ति, थ, हम ५५४, २०dन, सुरलि, ३विन्द्र विगेरे पास तया तास. सभास, तxel, , ससा, ती, ४ी विशेष क्षय; तथा delus. अधूया२४, रतु (अथुना), ५६२५, भाग २५6शिक्षी, पविगेरे सातश तथा जीन
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