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________________ छक्खंडागमे वग्गणा-खंड [५, ५, १४१ सव्वत्थोवाओ णिरगइपाओग्गाणुपुब्बिणामाए पयडीओ ॥ १४१ ॥ नरकगतिप्रायोग्यानुपूर्वी नामकर्मकी प्रकृतियां सबसे स्तोक हैं ॥ १४१ ॥ देवगइपाओग्गाणुपुव्विणामाए पयडीओ असंखेज्जदिगुणाओ ।। १४२ ॥ उनसे देवगतिप्रायोग्यानुपूर्वी नामकर्मकी प्रकृतियां असंख्यातगुणित हैं ॥ १४२ ॥ मणुसगइपाओग्गाणुपुविणामाए पयडीओ संखेज्जगुणाओ ॥ १४३ ॥ उनसे मनुष्यगतिप्रायोग्यानुपूर्वी नामकर्मकी प्रकृतियां संख्यातगुणी हैं ॥ १४३ ।। तिरिक्खगइपाओग्गाणुपुब्धिणामाए पयडीओ असंखेज्जगुणाओ ॥ १४४ ॥ उनसे तिर्यंचगतिप्रायोग्यानुपूर्वी नामकर्मकी प्रकृतियां असंख्यातगुणी हैं ॥ १४४ ॥ भूओ अप्पाबहुअं ।। १४५ ॥ फिर भी उस अल्पबहुत्त्वको कहते हैं || १४५ ॥ सव्वत्थोवा मणुसगइपाओग्गाणुपुव्विणामाए पथडीओ ॥ १४६ ॥ निरयगइपाओग्गाणुपुषिणामाए पयडीओ असंखेज्जगुणाओ ॥ १४७॥ देवगइपाओग्गाणुपुब्धिणामाए पयडीओ असंखेज्जगुणाओ ॥१४८॥ तिरिक्खगइपाओग्गाणुपुब्बिणामाए पयडीओ असंखेज्जगुणाओ ॥१४९ ॥ मनुष्यगतिप्रायोग्यानुपूर्वी नामकर्मकी प्रकृतियां सबसे अल्प हैं ॥ १४६ ॥ उनसे नरकगतिप्रायोग्यानुपूर्वी नामकर्मकी प्रकृतियां असंख्यातगुणी हैं ॥ १४७ ॥ उनसे देवगतिप्रायोग्यानुपूर्वी नामकर्मकी प्रकृतियां असंख्यातगुणी हैं ॥ १४८ ॥ उनसे तिर्यंचगतिप्रायोग्यानुपूर्वी नामकर्मकी प्रकृतियां असंख्यातगुणी हैं ॥ १४९ ॥ __अगुरुअलहुअणामं उवघादणामं परघादणाम उस्सासणामं आदावणामं उज्जोवणामं विहायगदिणामं तसणामं थावरणामं बादरणामं सुहुमणामं पज्जत्तणामं अपज्जत्तणामं पत्तेयसरीरणामं साधारणसरीरणामं थिरणामं अथिरणामं सुहणामं असुहणामं सुभगणामं दुभगणामं सुस्सरणामं दुस्सरणामं आदेज्जणामं अणादेज्जणामं जसकित्तिणामं अजसकित्तिणामं णिमिणणामं तित्थयरणामं ॥ १५० ॥ अगुरुलघुनाम, उपघातनाम, परघातनाम, उच्छ्वासनाम आतापनाम, उद्योतनाम विहायोगतिनाम, त्रसनाम, स्थावरनाम, बादरनाम, सूक्ष्मनाम, पर्याप्तनाम, अपर्याप्तनाम, प्रत्येकशरीरनाम, साधारणशरीरनाम, स्थिरनाम, अस्थिरनाम, शुभनाम, अशुभनाम, सुभगनाम, दुर्भगनाम, सुस्वरनाम, दुःस्वरनाम, आदेयनाम, अनादेयनाम, यशःकीर्तिनाम, अयशःकीर्तिनाम, निर्माणनाम, और तीर्थकरनाम; ये नामकर्मकी अपिण्ड प्रकृतियां हैं ।। १५० ॥ गोदस्स कम्मस्स केवडियाओ पयडीओ? ॥१५१ ॥ गोदस्स कम्मस्स दुवे पयडीओ उच्चागोदं चेव णीचागोदं चेव । एवडियाओ पयडीओ ॥ १५२ ।। Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.600006
Book TitleShatkhandagam
Original Sutra AuthorPushpadant, Bhutbali
Author
PublisherWalchand Devchand Shah Faltan
Publication Year1965
Total Pages966
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationManuscript
File Size20 MB
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