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________________ ६७६ ] छ+ खंडागमे यणाखंड [ ४, २, १३, २८५ जस्स णाणावरणीयवेणा खेत्तदो जहण्णा तस्स सत्तण्णं कम्माणं वेयणा खेत्तदो किं जहण्णा अण्णा १ ।। २८५ ।। जहण्णा ॥ २८६ ॥ जिसके ज्ञानावरणीयकी वेदना क्षेत्रकी अपेक्षा जघन्य होती है उसके शेष सात कर्मोकी वेदना उस क्षेत्रकी अपेक्षा क्या जघन्य होती है या अजघन्य : ॥ २८५ ॥ वह उसके जघन्य होती है ॥ २८६ ॥ एवं सत्तणं कम्माणं ॥ २८७ ॥ इसी प्रकार शेष सात कर्मोंकी भी प्रकृत प्ररूपणा जाननी चाहिये ॥ २८७ ॥ जस्स णाणावरणीयवेयणा कालदो जहण्णा तस्स दंसणावरणीय अंतरायवेयणा कालदो किं जहण्णा अजहण्णा ? ।। २८८ || जहण्णा ।। २८९ ।। जिसके ज्ञानावरणीयकी वेदना कालकी अपेक्षा जघन्य होती है उसके दर्शनावरणीय और अन्तरायकी वेदना कालकी अपेक्षा क्या जघन्य होती है या अजघन्य ? ॥ २८८ ॥ वह उसके जघन्य होती है ॥ २८९ ॥ तस्स वेयणीय- आउअ णामा - गोदवेयणा कालदो किं जहण्णा अजहण्णा १ ।। २९० ॥ णियमा अजहण्णा असंखेज्जगुणन्भहिया ।। २९१ ॥ उसके वेदनीय, आयु, नाम और गोत्रकी वेदना कालकी अपेक्षा क्या जघन्य होती है या अजघन्य ? ।। २९० ।। उसके वह अजघन्य होकर असंख्यातगुणी अधिक होती है ।। २९१ ॥ तस्स मोहणीयणा कालदो जहणिया णत्थि ॥ २९२ ॥ उसके मोहनीयकी वेदना कालकी अपेक्षा जघन्य नहीं होती है ॥ २९२ ॥ एवं दंसणावरणीय अंतराइयाणं ।। २९३ ।। इसी प्रकार दर्शनावरण और अन्तरायकी भी प्रकृत प्ररूपणा जाननी चाहिये || २९४ ॥ जस्स वेयणीयवेणा कालदो जहण्णा तस्स णाणावरणीय दंसणावरणीय मोहणीयअंतरायाणं वेणा कालदो जहणिया णत्थि ॥ २९४ ॥ जिसके वेदनीयकी वेदना कालकी अपेक्षा जघन्य होती है उसके ज्ञानावरणीय, दर्शनावरणीय, मोहनीय और अन्तरायकी वेदना कालकी अपेक्षा जघन्य नहीं होती है ॥ २९४ ॥ तस्स आउअ - णामा - गोदवेयणा कालदो किं जहण्णा अजहण्णा १ ।। २९५ जहण्णा ।। २९६ ॥ उसके आयु, नाम और गोत्रकी वेदना कालकी अपेक्षा क्या जघन्य होती है या अजघन्य ? ॥ २९५ ॥ उसके उक्त आयु आदिकी वेदना कालकी अपेक्षा जघन्य होती है ॥ २९६ ॥ एवमाउअ - णामा - गोदाणं ॥ २९७ ॥ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.600006
Book TitleShatkhandagam
Original Sutra AuthorPushpadant, Bhutbali
Author
PublisherWalchand Devchand Shah Faltan
Publication Year1965
Total Pages966
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationManuscript
File Size20 MB
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