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________________ ४, २, १३, ३०८] वेयणमहाहियारे वेयणसण्णियासविहाणाणियोगद्दारं [६७७ जिस प्रकार यहां वेदनीयके संनिकर्षकी प्ररूपणा की गई है उसी प्रकार आयु, नाम और गोत्र कर्मके संनिकर्षकी भी प्ररूपणा जाननी चाहिये ॥ २९७ ॥ जस्स मोहणीयवेयणा कालदो जहण्णा तस्स सत्तण्णं कम्माणं वेयणा कालदो किं जहण्णा अजहण्णा ? ॥ २९८ ॥ णियमा अजहण्णा असंखेज्जगुणब्भहिया ॥ २९९ ॥ जिसके मोहनीयकी वेदना कालकी अपेक्षा जघन्य होती है उसके शेष सात कर्मोकी वेदना कालकी अपेक्षा क्या जघन्य होती है या अजघन्य ? ॥ २९८ ॥ उसके वह नियमसे अजघन्य असंख्यातगुणी अधिक होती है ॥ २९९ ॥ जस्स णाणावरणीयवेयणा भावदो जहण्णा तस्स दंसणावरणीय-अंतराइयवेयणा भावदो किं जहण्णा अजहण्णा ? ॥ ३०० ॥ जहण्णा ॥ ३०१॥ जिस जीवके ज्ञानावरणीयकी वेदना भावकी अपेक्षा जघन्य होती है उसके दर्शनावरणीय और अन्तरायकी वेदना भावकी अपेक्षा क्या जघन्य होती है या अजघन्य ? ॥ ३०० ॥ उसके इन दोनों कर्मोंकी वेदना भावकी अपेक्षा जघन्य होती है ॥ ३०१ ॥ तस्स वेयणीय - आउअ-णामा-गोदवेयणा भावदो किं जहण्णा अजहण्णा ? ॥ ३०२ ॥ णियमा अजहण्णा अणंतगुणब्भहिया ॥ ३०३ ॥ उसके वेदनीय, आयु, नाम और गोत्रकी वेदना भावकी अपेक्षा क्या जघन्य होती है या अजघन्य ? ॥ ३०२ ॥ उसके इन कर्मोंकी वेदना भावकी अपेक्षा नियमसे अजघन्य और अनन्तगुणी अधिक होती है ॥ ३०३ ।। तस्स मोहणीयवेयणा भावदो जहणिया णत्थि ॥ ३०४ ॥ उसके मोहनीयकी वेदना भावकी अपेक्षा जघन्य नहीं होती है ॥ ३०४ ॥ एवं दंसणावरणीय-अंतराइयाणं ॥ ३०५॥ भावकी अपेक्षा जिस प्रकार ज्ञानावरणीयके संनिकर्षकी प्ररूपणा की गई है उसी प्रकारसे दर्शनावरणीय और अन्तरायके संनिकर्षकी प्ररूपणा जाननी चाहिये ॥ ३०५ ॥ जस्स वेयणीयवेयणा भावदो जहण्णा तस्स णाणावरणीय-दंसणावरणीय-मोहणीयअंतराइयवेयणा भावदो जहणिया णत्थि ॥ ३०६ ॥ जिस जीवके वेदनीय कर्मकी वेदना भावकी अपेक्षा जघन्य होती हैं उसके ज्ञानावरणीय, दर्शनावरणीय, मोहनीय और अन्तरायकी वेदना भावकी अपेक्षा जघन्य नहीं होती है ॥ ३०६ ॥ तस्स आउअ - णामा-गोदवेयणा भावदो किं जहण्णा अजहण्णा ? ॥ ३०७ ॥ णियमा अजहण्णा अणंतगुणब्भहिया ॥ ३०८ ॥ ___उसके आयु, नाम और गोत्रकी वेदना भावकी अपेक्षा क्या जघन्य होती है या अजघन्य ? Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.600006
Book TitleShatkhandagam
Original Sutra AuthorPushpadant, Bhutbali
Author
PublisherWalchand Devchand Shah Faltan
Publication Year1965
Total Pages966
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationManuscript
File Size20 MB
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