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________________ ४, २, १३, २८४ ] वेयणमहाहियारे वेयणसण्णियासविहाणाणियोगद्दारं (६७५ जस्स वेयणीयवेयणा दव्वदो जहण्णा तस्स णाणावरणीय-दंसणावरणीय-मोहणीयअंतराइयाणं वेयणा दव्वदो जहणिया णस्थि ॥ २७२ ॥ जिसके वेदनीयकी वेदना द्रव्यकी अपेक्षा जघन्य होती है उसके ज्ञानावरणीय, दर्शनावरणीय, मोहनीय और अन्तरायकी वेदना द्रव्यकी अपेक्षा जघन्य नहीं होती ।। २७२ ॥ तस्स आउअवेयणा दव्वदो किं जहण्णा अजहण्णा ? ॥२७३ ॥ णियमा अजहण्णा असंखेज्जगुणब्भहिया ॥ २७४॥ उसके आयुकी वेदना द्रव्यकी अपेक्षा क्या जघन्य होती है या अजघन्य ? ॥ २७३ ।। उसके वह नियमसे अजघन्य और असंख्यातगुणी अधिक होती है ॥ २७४ ॥ __ तस्स गामा-गोदवेयणा दव्वदो किं जहण्णा अजहण्णा ? ॥ २७५ ॥ जहण्णा वा अजहण्णा वा, जहण्णादो अजहण्णा विट्ठाणपदिदा ॥ २७६ ॥ अणंतभागब्भहिया वा असंखेज्जभागब्भहिया वा ॥ २७७ ॥ उसके नाम और गोत्रकी वेदना द्रव्यकी अपेक्षा क्या जघन्य होती है या अजघन्य ? ॥ २७५ ॥ वह उसके जघन्य भी होती है और अजघन्य भी होती है। जघन्यसे वह अजघन्य इन दो स्थानोंमें पतित होती है ॥२७६।। अनन्तभाग अधिक और असंख्यातभाग अधिक ॥२७७॥ एवं णामा-गोदाणं ॥ २७८ ।। इसी प्रकार नाम और गोत्रकी भी प्रकृत प्ररूपणा जाननी चाहिये ॥ २७८ ॥ जस्स मोहणीयवेयणा दव्वदो जहण्णा तस्स छण्णं कम्माणमाउअवज्जाणं वेयणा दव्वदो किं जहण्णा अजहण्णा ? ॥ २७९ ॥ णियमा अजहण्णा असंखेज्जभागब्भहिया । जिसके मोहनीयकी वेदना द्रव्यकी अपेक्षा जघन्य होती है उसके आयुको छोड़कर शेष छह कर्मोंकी वेदना द्रव्यकी अपेक्षा क्या जघन्य होती है या अजघन्य ? ॥ २७९ ॥ उसके वह नियमसे अजघन्य और असंख्यातवें भाग अधिक होती है ॥ २८० ॥ तस्स आउअवेयणा दव्वदो किं जहण्णा अजहण्णा ? ॥२८१॥ णियमा अजहण्णा असंखेज्जगुणब्भहिया ॥ २८२ ॥ ___ उसके आयुकी वेदना द्रव्यकी अपेक्षा क्या जघन्य होती है या अजघन्य ? ॥ २८१ ॥ उसके वह नियमसे अजघन्य और असंख्यातगुणी अधिक होती है ॥ २८२ ।। जस्स आउअवेयणा दव्वदो जहण्णा तस्स सत्तण्णं कम्माणं वेयणा दव्वदो किं जहण्णा अजहण्णा ? ॥ २८३ ॥ णियमा अजहण्णा चउट्ठाणपदिदा ॥ २८४ ॥ जिसके आयुकी वेदना द्रव्यकी अपेक्षा जघन्य होती है उसके शेष सात कर्मोंकी वेदना द्रव्यकी अपेक्षा क्या जघन्य होती है या अजधन्य ? ॥ २८३ ॥ उसके वह नियमसे अजघन्य होकर चार स्थानोंमें पतित होती है ॥ २८४ ॥ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.600006
Book TitleShatkhandagam
Original Sutra AuthorPushpadant, Bhutbali
Author
PublisherWalchand Devchand Shah Faltan
Publication Year1965
Total Pages966
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationManuscript
File Size20 MB
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