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________________ ६७४] छक्खंडागमे वेयणाखंडं [४, २, १३, २५९ एवं णामा-गोदाणं ॥ २५९ ॥ इसी प्रकार नाम और गोत्र कर्मकी प्रकृत प्ररूपणा जाननी चाहिये ॥ २५९ ॥ जस्स आउअवेयणा भावदो उक्कस्सा तस्स सत्तण्णं कम्माणं भावदो किमुक्कस्सा अणुक्कस्सा ? ॥२६०॥ णियमा अणुक्कस्सा अणंतगुणहीणा ।। २६१ ॥ जिसके आयुकी वेदना भावकी अपेक्षा उत्कृष्ट होती है उसके सात शेष कर्मोकी वेदना भावकी अपेक्षा क्या उत्कृष्ट होती है या अनुत्कृष्ट ? ॥ २६० ॥ उसके वह नियमसे अनुत्कृष्ट और अनन्तगुणी हीन होती है ॥ २६१ ॥ जो सो थप्पो जहण्णओ परत्थाणवेयणसण्णियासो सो चउन्विहो दव्वदो खेत्तदो कालदो भावदो चेदि ॥ २६२ ।। जो जघन्य परस्थान वेदनासंनिकर्ष स्थगित किया गया था वह द्रव्य, क्षेत्र, काल और भावकी अपेक्षासे चार प्रकारका है ॥ २६२ ॥ जस्स णाणावरणीयवेयणा दव्वदो जहण्णा तस्स दंसणावरणीय-अंतराइयवेयणा दव्वदो किं जहण्णा अजहण्णा ? ॥२६३ ॥ जहण्णा वा अजहण्णा वा, जहण्णादो अजहण्णा विट्ठाणपदिदा ॥ २६४ ॥ अणंतभागब्भहिया वा असंखेज्जभागब्भहिया वा ॥ २६५ ॥ जिसके ज्ञानावरणीयकी वेदना द्रव्यकी अपेक्षा जघन्य होती है उसके दर्शनावरणीय और अन्तरायकी वेदना द्रव्यकी अपेक्षा क्या जघन्य होती है या अजघन्य ? ॥ २६३ ॥ उसके वह जघन्य भी होती है और अजघन्य भी होती है। जघन्यसे वह अजघन्य इन दो स्थानोंमें पतित है ।। २६४ ॥ अनन्तभाग अधिक और असंख्यातभाग अधिक ॥ २६५ ॥ तस्स वेयणीय-णामा-गोदवेयणा दव्यदो किं जहण्णा अजहण्णा ? ॥२६६ ॥ णियमा अजहण्णा असंखेज्जभागब्भहिया ॥ २६७ ॥ उसके वेदनीय, नाम और गोत्रकी वेदना द्रव्यकी अपेक्षा क्या जघन्य होती है या अजघन्य ? ॥२६६॥ उसके वह नियमसे अजघन्य और असंख्यातवें भाग अधिक होती है ॥२६॥ तस्स मोहणीयवेयणा दव्वदो जहणिया णत्थि ॥ २६८॥ उसके मोहनीयकी वेदना द्रव्यकी अपेक्षा जघन्य नहीं होती ।। २६८ ॥ तस्स आउअवेयणा दव्वदो किं जहण्णा अजहण्णा ? ॥२६९ ॥ णियमा अजहण्णा असंखेज्जगुणब्भहिया ॥ २७० ॥ उसके आयुकी वेदना द्रव्यकी अपेक्षा क्या जघन्य होती है या अजघन्य ? ॥ २६९ ।। उसके वह नियमसे अजधन्य और असंख्यातगुणी अधिक होती है ॥ २७० ॥ एवं दंसणावरणीय-अंतराइयाणं ॥ २७१ ॥ इसी प्रकारसे दर्शनावरणीय और अन्तरायकी भी प्रकृत प्ररूपणा जाननी चाहिये ॥२७॥ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.600006
Book TitleShatkhandagam
Original Sutra AuthorPushpadant, Bhutbali
Author
PublisherWalchand Devchand Shah Faltan
Publication Year1965
Total Pages966
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationManuscript
File Size20 MB
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