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वेयणमहाहियारे वेयणभावविहाणे अप्पाबहुअं
aritraणा भावदो जहणिया अनंतगुणा ॥ ४७ ॥
उससे भावकी अपेक्षा वेदनीय कर्मकी जघन्य वेदना अनन्तगुणी है ॥ ४७ ॥ जघन्य पदविषयक अल्पबहुत्त्व समाप्त हुआ ||
४, २, ७, ५७ ]
उक्कस्सपदेण सव्वत्थोवा आउववेयणा भावदो उक्कस्सिया ।। ४८ ।। उत्कृष्ट पदका अवलम्बन लेकर भावकी अपेक्षा आयु कर्मकी उत्कृष्ट वेदना सबसे स्तोक है । गाणावरणीय दंसणावरणीय अंतराइयवेयणाओ भावदो उक्कस्सियाओ तिष्णि वि तुल्लाओ अनंतगुणाओ ॥ ४९ ॥
भावकी अपेक्षा ज्ञानावरणीय, दर्शनावरणीय और अन्तरायकी उत्कृष्ट वेदनायें तीनों ही तुल्य होकर आयुकर्मकी उस उत्कृष्ट वेदनासे अनन्तगुणी है ॥ ४९ ॥
मोहणीयणा भावदो उक्कस्सिया अनंतगुणा ।। ५० ।।
उससे भावकी अपेक्षा मोहनीयकी उत्कृष्ट वेदना अनन्तगुणी है ॥ ५० ॥
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णामा - गोद्रवेयणाओ भावदो उक्कस्सियाओ दो वि तुलाओ अनंतगुणाओ ॥ ५१ ॥ उससे भावकी अपेक्षा नाम व गोत्रकी उत्कृष्ट वेदनायें दोनों ही तुल्य होकर अनन्तगुणी हैं ॥ aritraणा भावदो उक्कस्सिया अणंतगुणा ।। ५२ ।।
उनसे भावकी अपेक्षा वेदनीयकी उत्कृष्ट वेदना अनन्तगुणी है ॥ ५२ ॥ उत्कृष्ट पदविषयक अल्पबहुत्व समाप्त हुआ ||
जहण्णुक्कस्पदेण सव्वत्थोवा मोहणीयवेयणा भावदो जहणिया ॥ ५३ ॥ जघन्य-उत्कृष्ट पदसे भावकी अपेक्षा मोहनीयकी जघन्य वेदना सबसे स्तोक है ॥ ५३ ॥ अंतराइयवेयणा भावदो जहण्णिया अनंतगुणा ॥ ५४ ॥
उससे भावकी अपेक्षा अन्तरायकी जघन्य वेदना अनन्तगुणी है ॥ ५४ ॥ णाणावरणीय - दंसणावरणीयवेयणा भावदो जहण्णियाओ दो वि तुल्लाओ अतगुणाओ ।। ५५ ।
उससे भावकी अपेक्षा ज्ञानावरणीय और दर्शनावरणीयकी जघन्य वेदनायें दोनों ही तुल्य होती हुई अनन्तगुणी हैं ॥ ५५ ॥
अवेणा भावदो जहण्णिया अनंतगुणा ॥ ५६ ॥
उनसे भावकी अपेक्षा आयुकी जघन्य वेदना अनन्तगुणी है ॥ ५६ ॥ गोदवेणाभावदो जहण्णिया अनंतगुणा ।। ५७ ॥
उससे भावकी अपेक्षा गोत्र कर्मकी जघन्य वेदना अनन्तगुणी है ॥ ५७ ॥
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