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________________ ६१६] छक्खंडागमे वेयणाखंड [ ४, २, ७, २० तव्वदिरित्तमणुक्कस्सा ॥ २० ॥ उपर्युक्त आयुकी उत्कृष्ट भाववेदनासे भिन्न उसकी अनुत्कृष्ट भाववेदना जानना चाहिये । सामित्तेण जहण्णपदे णाणावरणीयवेयणा भावदो जहणिया कस्स ? ॥ २१ ॥ स्वामित्वसे जघन्य पदमें ज्ञानावरणीयकी वेदना भावकी अपेक्षा जघन्य किसके होती है । अण्णदरस्स खवगस्स चरिमसमयछदुमत्थस्स गाणावरणीय वेयणा भावदो जहण्णा ॥२२॥ अन्यतर क्षपक अन्तिम समयवर्ती छद्मस्थ जीवके ज्ञानावरणीयको वेदना भावकी अपेक्षा जघन्य होती है ॥ २२ ॥ तबदिरित्तमजहण्णा ॥ २३॥ उपर्युक्त ज्ञानावरणीयकी जघन्य भाववेदनासे भिन्न उसकी अजघन्य भाववेदना होती है ।। एवं दंसणावरणीय-अंतराइयाणं ॥ २४ ॥ इसी प्रकार दर्शनावरणीय और अन्तरायकी भी जघन्य अजघन्य भाववेदना जानना चाहिये ॥ २४ ॥ सामित्तेण जहण्णपदे वेयणीयवेयणा भावदो जहणिया कस्स ? ॥ २५ ॥ स्वामित्वसे जघन्य पदमें वेदनीयकी वेदना भावकी अपेक्षा जघन्य किसक होती है ! ॥ अण्णदरस्स खवगस्स चरिमसमयभवसिद्धियस्स असादवेदयस्स तस्स वेयणीयवेयणा भावदो जहण्णा ॥ २६ ॥ असातावेदनीयका वेदन करनेवाले अन्तिम समयवर्ती भवसिद्धिक अन्यतर क्षपक्के वेदनीयकी वेदना भावकी अपेक्षा जघन्य होती है ॥ २६ ॥ तव्वदिरित्तमजहण्णा ॥ २७ ॥ उपर्युक्त वेदनीयकी जघन्य भाववेदनासे भिन्न उसकी अजघन्य भाववेदना होती है ॥ सामित्तेण जहण्णपदे मोहणीयवेयणा भावदो जहणिया कस्स ? ॥२८॥ स्वामित्वसे जघन्य पदमें मोहनीयकी वेदना भावकी अपेक्षा जघन्य 'किसके होती है । अण्णदरस्स खवगस्स चरिमसमयसकसाइस्स तस्स मोहणीयवेयणा भावदो जहण्णा॥ अन्तिम समयवर्ती सकषाय अन्यतर क्षपकके मोहनीयकी वेदना भावकी अपेक्षा जघन्य होती है ॥ २९ ॥ तव्वदिरित्तमजहण्णा ॥ ३० ॥ उपर्युक्त उत्कृष्ट वेदनासे भिन्न उसकी अजघन्य वेदना होती है ॥ ३० ॥ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.600006
Book TitleShatkhandagam
Original Sutra AuthorPushpadant, Bhutbali
Author
PublisherWalchand Devchand Shah Faltan
Publication Year1965
Total Pages966
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationManuscript
File Size20 MB
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