SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 554
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ [ ४२९ २, ७, १८०] फोसणाणुगमे दंसणमग्गणा केवलज्ञानी जीवोंकी स्पर्शनप्ररूपणा अपगदवेदियोंके समान है ॥ १६७ ॥ संजमाणुवादेण संजदा जहाक्खाद-विहार-सुद्धिसंजदा अकसाइभंगो ॥ १६८॥ संयममार्गणाके अनुसार संयत और यथाख्यात-विहार-शुद्धिसंयत जीवोंके स्पर्शनकी प्ररूपणा अकषायी जीवोंके समान है ॥ १६८ ॥ सामाइयच्छेदोवट्ठावणसुद्धिसंजद [परिहारसुद्धिसंजद] सुहुमसापराइयसंजदाणं मणपज्जवणाणिभंगो ॥ १६९॥ ___सामायिक छेदोपस्थापनाशुद्धिसंयत, परिहारशुद्धिसंपत और सूक्ष्मसाम्परायिकसंयत जीवोंके स्पर्शनकी प्ररूपगा मनःपर्ययज्ञानियोंके समान है ॥ १६९ ॥ संजदासजदा सत्थाणेहि केवडियं खेतं फोसिदं ? ॥ १७० ॥ लोगस्स असंखेज्जदिभागो ॥ १७१ ॥ संयतासंयत जीवोंने स्वस्थान पदोंसे कितना क्षेत्र स्पर्श किया है ? ॥ १७० ॥ स्वस्थान पदोंसे उन्होंने लोकका असंख्यातवां भाग स्पर्श किया है ॥ १७१ ॥ ___ समुग्घादेहि केडियं खेत्तं फोसिदं ? ॥ १७२ ॥ लोगस्स असंखेज्जदिभागो ॥ १७३ ॥ छ-चोद्दसभागा देसूणा ।। १७४ ॥ समुद्धातोंकी अपेक्षा संयतासंयत जीवोंने कितना क्षेत्र स्पर्श किया है ? ॥ १७२ ॥ समुद्वातोंकी अपेक्षा उन्होंने लोकका असंख्यातवां भाग स्पर्श किया है ॥१७३ ॥ तथा अतीत कालकी अपेक्षा उक्त जीवोंने कुछ कम छह बटे चौदह भाग स्पर्श किये हैं ॥ १७४ ॥ उववादं णथि ॥ १७५ ॥ संयतासंयत जीवोंके उपपाद पद नहीं होता है ॥ १७५ ॥ असंजदाणं णqसयभंगो ॥ १७६ ॥ असंयत जीवोंके स्पर्शनकी प्ररूपणा नपुंसकवेदियोंके समान है ॥ १७६ ॥ दंसणाणुवादेण चक्खुदंसणी सत्थाणेहि केवडियं खेत्तं फोसिदं १ ॥ १७७ ॥ लोगस्स असंखेज्जदिभागो ॥ १७८ ॥ अट्ठ-चोद्दसभागा वा देसूणा ।। १७९ ॥ दर्शनमार्गणाके अनुसार चक्षुदर्शनी जीवोंने स्वस्थान पदोंसे कितना क्षेत्र स्पर्श किया है ? ॥ १७७ ।। चक्षुदर्शनी जीवोंने स्वस्थान पदोंसे लोकका असंख्यातवां भाग स्पर्श किया है ॥ १७८ ॥ तथा अतीत कालकी अपेक्षा उन्होंने स्वस्थान पदोंसे कुछ कम आठ बटे चौदह भाग स्पर्श किये हैं ॥ १७९॥ समुग्घादेहि केवडियं खेतं फोसिदं ? ॥ १८० ॥ लोगस्स असंखेज्जदिभागो Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.600006
Book TitleShatkhandagam
Original Sutra AuthorPushpadant, Bhutbali
Author
PublisherWalchand Devchand Shah Faltan
Publication Year1965
Total Pages966
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationManuscript
File Size20 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy