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________________ २, ६, ५] खेत्ताणुगमे गदिमग्गणा [ ४०७ असण्णी असंजदभंगो ॥ १६७ ॥ असंज्ञी जीवोंका द्रव्यप्रमाण असंयतोंके समान है ॥ १६७ ॥ आहाराणुवादेण आहारा आणाहारा दव्वपमाणेण केवडिया ? ॥१६८॥ अणंता॥ आहारमार्गणाके अनुसार आहारक और अनाहारक जीव द्रव्यप्रमाणसे कितने हैं ? ॥:१६८ ॥ अनन्त हैं ।। १६९ ॥ अणंताणताहि ओसप्पिणि-उस्सप्पिणीहि ण अवहिरंति कालेण ॥ १७० ॥ आहारक और अनाहारक जीव कालकी अपेक्षा अनन्तानन्त अवसर्पिणी-उत्सर्पिणियोंसे अपहृत नहीं होते हैं ।। १७० ॥ खेत्तेण अणंताणंता लोगा ॥ १७१ ॥ आहारक और अनाहारक जीव क्षेत्रको अपेक्षा अनन्तानन्त लोक प्रमाण हैं ॥ १७१ ॥ ॥ द्रव्यप्रमाणानुगम समाप्त हुआ ॥ ५ ॥ ६. खेत्ताणुगमो खेत्ताणुगमेण गदियाणुवादेण गिरयगदीए णेरइया सत्थाणेण समुग्धादेण उववादेण केवडिखेत्ते ? ॥१॥ क्षेत्रानुगमसे गतिमार्गणाके अनुसार नरकगतिमें नारकी जीव स्वस्थान, समुद्घात और उपपादसे कितने क्षेत्रमें रहते हैं ? ॥ १॥ लोगस्स असंखेजदिभागे ॥ २ ॥ नरकगतिमें नारकी जीव उक्त तीन पदोंकी अपेक्षा लोकके असंख्यातवें भागमें रहते हैं । एवं सत्तसु पुढवीसु णेरड्या ॥३॥ इसी प्रकार सात पृथिवियोंमें नारकी जीव उपर्युक्त तीन पदोंकी अपेक्षा लोकके असंख्यातवें भागमें रहते हैं ॥ ३ ॥ तिरिक्खगदीए तिरिक्खा सत्थाणेण समुग्धादेण उववादण केवडिखेत्ते ? ॥ ४ ॥ तिर्यंचगतिमें तिर्यंच जीव स्वस्थान, समुद्घात और उपपादसे कितने क्षेत्रमें रहते हैं ? ॥ सबलोए ॥५॥ तिर्यंचगतिमें तिर्यंच जीव उक्त तीन पदोंकी अपेक्षा सर्वलोकमें रहते हैं ? ॥ ५॥ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.600006
Book TitleShatkhandagam
Original Sutra AuthorPushpadant, Bhutbali
Author
PublisherWalchand Devchand Shah Faltan
Publication Year1965
Total Pages966
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationManuscript
File Size20 MB
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