SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 531
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ ४०६ ] छवखंडागमे खुद्दाबंधो [ २, ५, १५२ सुक्कलेस्सिया दव्वपमाणेण केवडिया ? ।। १५२ || पलिदोवमस्स असंखेज्जदि भागो ।। १५३ ।। शुक्लेश्यावाले जीव द्रव्यप्रमाणसे कितने हैं ? ॥ १५२ ॥ पल्योपमके असंख्यातवें भाग प्रमाण हैं ।। १५३ ॥ एदेहि पलिदोवममवहिरदि अंतोमुहुत्ते ।। १५४ ।। उनके द्वारा अन्तर्मुहूर्तसे पल्योपम अपहृत होता है ॥ १५४ ॥ भवियाणुवादेण भवसिद्धिया दव्वषमाणेण केवडिया ? || १५५ || अनंता ।। १५६॥ " भव्यमार्गणा के अनुसार भव्यसिद्धिक द्रव्यप्रमाणसे कितने हैं ? ॥ १५५ ॥ अनन्त हैं ॥ ताहि ओसपिणि उस्सप्पिणीहि ण अवहिरंति कालेण ।। १५७ ॥ भव्यसिद्धिक कालकी अपेक्षा अनन्तानन्त अवसर्पिणी - उत्सापणियों से अपहृत नहीं होते हैं ॥ १५७ ॥ खेत्ते अणंताणंता लोगा ॥ १५८ ॥ भव्यसिद्धिक जीव क्षेत्रकी अपेक्षा अनन्तानन्त लोक प्रमाण हैं ॥ १५८ ॥ अभवसिद्धिया दव्वपमाणेण केवडिया ? ।। १५९ ।। अनंता ।। १६० ॥ अभव्यसिद्धिक द्रव्यप्रमाणसे कितने हैं ? ॥ १५९ ॥ अनन्त हैं ॥ १६० ॥ सम्मत्ताणुवादेण सम्मादिट्ठी खइयसम्माइट्ठी वेदगसम्मादिट्ठी उवसमसम्मादिट्ठी सास सम्माट्ठी सम्मामिच्छाइट्ठी दव्वपमाणेण केवडिया ? ।। १६१ ॥ सम्यक्त्वमार्गणा के अनुसार सम्यग्दृष्टि, क्षायिकसम्यग्दृष्टि, वेदकसम्यग्दृष्टि, उपशमसम्यग्दृष्टि, सासादनसम्यग्दृष्टि और सम्यग्मिथ्यादृष्टि द्रव्यप्रमाणसे कितने हैं ? ॥ १६१ ॥ पलिदोवमस्स असंखेज्जदिभागो ॥ १६२ ॥ उपर्युक्त जीवराशियोंमें प्रत्येक पल्योपमके असंख्यातवें भाग प्रमाण हैं ॥ १६२ ॥ देहि पलिदो ममवहिरदि अंतोमुहुत्ते || १६३ ॥ उक्त जीवों द्वारा अन्तर्मुहूर्तसे पल्योपम अपहृत होता है ॥ १६३ ॥ मिच्छाइट्ठी असंजदभंगो ॥ १६४ ॥ मिथ्यादृष्टियोंका द्रव्यप्रमाण असंयत जीवोंके समान है ॥ १६४ ॥ सणियाणुवादेण सण्णी दव्वपमाणेण केवडिया १ ।। १६५ ।। देवेहि सादिरेयं ॥ १६६ ॥ संज्ञीमार्गणा के अनुसार संज्ञी जीव द्रव्यप्रमाणसे कितने हैं ? ॥ १६५ ॥ द्रव्यप्रमाणकी अपेक्षा वे देवोंसे कुछ अधिक हैं ॥ १६६ ॥ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.600006
Book TitleShatkhandagam
Original Sutra AuthorPushpadant, Bhutbali
Author
PublisherWalchand Devchand Shah Faltan
Publication Year1965
Total Pages966
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationManuscript
File Size20 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy