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छवखंडागमे खुद्दाबंधो
[ २, ५, १५२
सुक्कलेस्सिया दव्वपमाणेण केवडिया ? ।। १५२ || पलिदोवमस्स असंखेज्जदि
भागो ।। १५३ ।।
शुक्लेश्यावाले जीव द्रव्यप्रमाणसे कितने हैं ? ॥ १५२ ॥ पल्योपमके असंख्यातवें भाग प्रमाण हैं ।। १५३ ॥
एदेहि पलिदोवममवहिरदि अंतोमुहुत्ते ।। १५४ ।।
उनके द्वारा अन्तर्मुहूर्तसे पल्योपम अपहृत होता है ॥ १५४ ॥
भवियाणुवादेण भवसिद्धिया दव्वषमाणेण केवडिया ? || १५५ || अनंता ।। १५६॥ " भव्यमार्गणा के अनुसार भव्यसिद्धिक द्रव्यप्रमाणसे कितने हैं ? ॥ १५५ ॥ अनन्त हैं ॥ ताहि ओसपिणि उस्सप्पिणीहि ण अवहिरंति कालेण ।। १५७ ॥
भव्यसिद्धिक कालकी अपेक्षा अनन्तानन्त अवसर्पिणी - उत्सापणियों से अपहृत नहीं होते हैं ॥ १५७ ॥
खेत्ते अणंताणंता लोगा ॥ १५८ ॥
भव्यसिद्धिक जीव क्षेत्रकी अपेक्षा अनन्तानन्त लोक प्रमाण हैं ॥ १५८ ॥ अभवसिद्धिया दव्वपमाणेण केवडिया ? ।। १५९ ।। अनंता ।। १६० ॥ अभव्यसिद्धिक द्रव्यप्रमाणसे कितने हैं ? ॥ १५९ ॥ अनन्त हैं ॥ १६० ॥ सम्मत्ताणुवादेण सम्मादिट्ठी खइयसम्माइट्ठी वेदगसम्मादिट्ठी उवसमसम्मादिट्ठी सास सम्माट्ठी सम्मामिच्छाइट्ठी दव्वपमाणेण केवडिया ? ।। १६१ ॥
सम्यक्त्वमार्गणा के अनुसार सम्यग्दृष्टि, क्षायिकसम्यग्दृष्टि, वेदकसम्यग्दृष्टि, उपशमसम्यग्दृष्टि, सासादनसम्यग्दृष्टि और सम्यग्मिथ्यादृष्टि द्रव्यप्रमाणसे कितने हैं ? ॥ १६१ ॥
पलिदोवमस्स असंखेज्जदिभागो ॥ १६२ ॥
उपर्युक्त जीवराशियोंमें प्रत्येक पल्योपमके असंख्यातवें भाग प्रमाण हैं ॥ १६२ ॥ देहि पलिदो ममवहिरदि अंतोमुहुत्ते || १६३ ॥
उक्त जीवों द्वारा अन्तर्मुहूर्तसे पल्योपम अपहृत होता है ॥ १६३ ॥
मिच्छाइट्ठी असंजदभंगो ॥ १६४ ॥
मिथ्यादृष्टियोंका द्रव्यप्रमाण असंयत जीवोंके समान है ॥ १६४ ॥
सणियाणुवादेण सण्णी दव्वपमाणेण केवडिया १ ।। १६५ ।। देवेहि सादिरेयं ॥ १६६ ॥ संज्ञीमार्गणा के अनुसार संज्ञी जीव द्रव्यप्रमाणसे कितने हैं ? ॥ १६५ ॥ द्रव्यप्रमाणकी अपेक्षा वे देवोंसे कुछ अधिक हैं ॥ १६६ ॥
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