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________________ ३९४ ] केवडिया ९ ॥ १ ॥ छक्खंडागमे खुदाबंधो ५. दव्वपमाणाणुगमो दव्वपमाणाणुगमेण गदियाणुवादेण णिरयगदीए णेरइया दव्वपमाणेण [ २, ५, १ द्रव्यप्रमाणानुगमसे गतिमार्गणानुसार नरकगतिमें नारकी जीव द्रव्यप्रमाणसे कितने हैं ? ॥ असंखेज्जा ॥ २ ॥ नरकगतिमें नारकी जीव द्रव्यप्रमाणसे असंख्यात हैं ॥ २ ॥ असंखेज्जासंखेज्जाहि ओसप्पिणि उस्सपिणीहि अवहिरंति कालेण || ३ || कालकी अपेक्षा नारकी जीव असंख्याता संख्यात अवसर्पिणी और उत्सर्पिणियोंसे अपहृत होते हैं ॥ ३ ॥ खेतेण असंखेज्जाओ सेडीओ || ४ || पदरस्स असंखेज्जदिभागो ॥ ५ ॥ क्षेत्रकी अपेक्षा उक्त नारकी जीव असंख्यात जगश्रेणी प्रमाण हैं ॥ ४ ॥ वे जगप्रतरके असंख्यातवें भाग मात्र असंख्यात जगश्रेणी प्रमाण हैं ॥ ५ ॥ तासिंडीणं विक्खभसूची अंगुलवग्गमूलं बिदियवग्गमूलगुणिदेण || ६ || उन जगश्रेणियोंकी विष्कम्भसूची सूच्यंगुलके द्वितीय वर्गमूलसे गुणित उसके प्रथम वर्गमूल प्रमाण है ॥ ६ ॥ एवं पढमाए पुढवीए रइया ॥ ७ ॥ इसी प्रकार प्रथम पृथिवीके नारकियोंका द्रव्यप्रमाण है ॥ ७ ॥ यहां प्रथम पृथिवीके नारकियोंका प्रमाण जो सामान्य नारकियोंके बराबर बतलाया गया है वह प्रतर असंख्यातवें भाग मात्र असंख्यात जगश्रेणीरूप आलापकी अपेक्षा समझना चाहिये । वस्तुतः प्रथम पृथिवीके नारकी सामान्य नारकियोंसे कम हैं। उनकी विष्कम्भसूची एक रूपके असंख्यातवें भागसे कम है । बिदियाए जाव सत्तमाए पुढवीए णेरइया दव्वपमाणेण केवडिया ? ॥ ८ ॥ द्वितीय पृथिवीसे लेकर सातवीं पृथिवी तक प्रत्येक पृथिवीके नारकी द्रव्यप्रमाणसे कितने हैं ? ॥ ८ ॥ Jain Education International असंखेज्जा || ९ || द्वितीयादि छह पृथिवियोंके नारकी द्रव्यप्रमाणसे असंख्यात हैं ॥ ९ ॥ असंखेज्जासंखेज्जाहि ओसप्पिणि-उस्सप्पिणीहि अवहिरंति कालेण ॥ १० ॥ द्वितीय पृथिवीसे लेकर सातवीं पृथिवी तक प्रत्येक पृथिवीके नारकी कालकी अपेक्षा असंख्यातासंख्यात अवसर्पिणी और उत्सर्पिणियोंसे अपहृत होते हैं ॥ १० ॥ For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.600006
Book TitleShatkhandagam
Original Sutra AuthorPushpadant, Bhutbali
Author
PublisherWalchand Devchand Shah Faltan
Publication Year1965
Total Pages966
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationManuscript
File Size20 MB
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