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________________ ३७८] छक्खंडागमे खुद्दाबंधो [२, २, १९७ अधिक वे छयासठ सागरोपम काल तक वेदकसम्यग्दृष्टि रहते हैं ॥ १९६ ॥ उवसमसम्मादिट्ठी सम्मामिच्छादिट्ठी केवचिरं कालादो होंति ? ॥ १९७ ॥ जीव उपशमसम्यग्दृष्टि और सम्यग्मिथ्याद्दष्टि कितने काल रहते हैं ? ।। १९७ ।। जहण्णेण अंतोमुहत्तं ॥ १९८ ॥ उक्कस्सेण अंतोमुत्तं ॥ १९९ ॥ जीव उपशमसम्यग्दृष्टि और सम्यग्मिथ्यादृष्टि कमसे कम अन्तर्मुहूर्त काल तक रहते हैं ॥ १९८ ॥ तथा अधिकसे अधिक वे अन्तर्मुहूर्त काल तक उपशमसम्यग्दृष्टि और सम्यग्मिथ्यादृष्टि रहते हैं ॥ १९९ ॥ सासणसम्माइट्ठी केवचिरं कालादो होंति ? ॥ २०० ॥ जीव सासादनसम्यग्दृष्टि कितने काल रहते हैं ? ॥ २०० ॥ जहण्णण एयसमओ ॥ २०१॥ उकस्सेण छावलियाओ ॥ २०२॥ जीव सासादनसम्यग्दृष्टि कमसे कम एक समय रहते हैं ॥ २०१ ॥ अधिकसे अधिक वे छह आवली तक सासादनसम्यग्दृष्टि रहते हैं । २०२ ॥ मिच्छादिट्ठी मदिअण्णाणिभंगो ॥२०३ ॥ मिथ्यादृष्टि जीवोंके कालकी प्ररूपणा मतिअज्ञानी जीवोंके समान है ॥ २०३ ॥ सणियाणुवादेण सण्णी केवचिरं कालादो होति ? ॥ २०४ ॥ संज्ञीमार्गणाके अनुसार जीव संज्ञी कितने काल रहते हैं ? ।। २०४ ॥ जहण्णेण खुद्दाभवग्गहणं ॥ २०५ ॥ उक्कस्सेण सागरोवमसदपुधत्तं ॥ २०६ ॥ जीव संज्ञी कमसे कम क्षुद्रभवग्रहण मात्र काल तक रहते हैं ॥ २०५॥ अधिकसे अधिक वे सागरोपमशतपृथक्त्व मात्र काल तक संज्ञी रहते हैं ॥ २०६ ॥ असण्णी केवचिरं कालादो होंति ? ॥ २०७॥ जीव असंज्ञी कितने काल रहते हैं ? ॥ २०७ ॥ जहण्णेण खुद्दाभवग्गहणं ॥२०८ ॥ उक्कस्सेण अणंतकालमसंखेज्जपोग्गलपरियढें ॥ जीव असंज्ञी कमसे कम क्षुद्रभवग्रहण मात्र काल तक रहते हैं ॥ २०८ ॥ अधिकसे अधिक वे असंख्यात पुद्गलपरिवर्तन प्रमाण अनन्त काल तक असंज्ञी रहते हैं ॥ २०९ ॥ आहाराणुवादेण आहारा केवचिरं कालादो होंति ? ॥ २१० ॥ आहारमार्गणाके अनुसार जीव आहारक कितने काल रहते हैं ? ॥ २१० ॥ जहण्णेण खुद्दाभवग्गहणं तिसमय॒णं ॥२११॥ उक्कस्सेण अंगुलस्स असंखेज्जदिभागो असंखेज्जासंखेज्जाओ ओसप्पिणि-उस्सप्पिणीओ ॥ २१२ ॥ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.600006
Book TitleShatkhandagam
Original Sutra AuthorPushpadant, Bhutbali
Author
PublisherWalchand Devchand Shah Faltan
Publication Year1965
Total Pages966
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationManuscript
File Size20 MB
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