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________________ २. एगजीवेण कालो एगजीवेण कालाणुगमेण गदियाणुवादेण णिरयगदीए गेरइया केवचिरं कालादो होंति ? ॥१॥ एक जीवकी अपेक्षा कालानुगमसे गतिमार्गणाके अनुसार नरकगतिमें नारकी जीव कितने काल रहते हैं ? ॥ १ ॥ जहण्णेण दसवस्ससहस्साणि ॥२॥ एक जीवकी अपेक्षा नारकी जीव नरकगतिमें कमसे कम दस हजार वर्ष रहते हैं ॥२॥ उक्कस्सेण तेत्तीसं सागरोवमाणि ॥३॥ वे अधिकसे अधिक वहां तेतीस सागरोपम काल तक रहते हैं ॥ ३ ॥ पढमाए पुढवीए णेरइया केवचिरं कालादो होंति ?॥४॥ प्रथम पृथिवीमें नारकी जीव कितने काल तक रहते हैं ? ॥ ४ ॥ जहण्णेण दसवासहस्साणि ॥ ५॥ नारकी जीव प्रथम पृथिवीमें एक जीवकी अपेक्षा कमसे कम दस हजार वर्ष रहते हैं ॥५॥ उक्कस्सेण सागरोवमं ॥६॥ वे प्रथम पृथिवीमें अधिकसे अधिक एक सागरोपम काल रहते हैं ॥ ६ ॥ विदियाए जाव सत्तमाए पुढवीए णेरइया केवचिरं कालादो होंति ? ॥७॥ दूसरी पृथिवीसे लेकर सातवीं पृथिवी तकके नारकी जीव नरकगतिमें कितने काल तक रहते हैं ? ॥ ७ ॥ जहण्णण एक्क तिण्णि सत्त दस सत्तारस बावीस सागरोवमाणि सादिरेयाणि ॥८॥ वे कमसे कम दूसरी पृथिवीमें कुछ ( एक समय) अधिक एक, तीसरीमें कुछ अधिक तीन, चौथीमें कुछ अधिक सात, पांचवींमें कुछ अधिक दस, छठीमें कुछ अधिक सत्तरह और सातवींमें कुछ अधिक बाईस सागरोपम काल तक रहते हैं ॥ ८ ॥ उक्कस्सेण तिणि सत्त दस सत्तारस बावीस तेत्तीसं सागरोवमाणि ॥ ९ ॥ नारकी जीव द्वितीयादि पृथिवियोंमें अधिकसे अधिक क्रमशः तीन, सात, दस, सत्तरह, बाईस और तेतीस सागरोपम काल तक रहते हैं ॥ ९ ॥ तिरिक्खगदीए तिरिक्खो केवचिरं कालादो होदि ? ॥१०॥ तिर्यंचगतिमें जीव तिर्यंच कितने काल रहता है ? ॥ १०॥ जहण्णण खुद्दाभवग्गहणं ॥११॥ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.600006
Book TitleShatkhandagam
Original Sutra AuthorPushpadant, Bhutbali
Author
PublisherWalchand Devchand Shah Faltan
Publication Year1965
Total Pages966
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationManuscript
File Size20 MB
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