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________________ २, १, २८ ] बंधगाबंधगपरूपणा सिद्धा अबंधा ॥ १८ ॥ सिद्ध अबन्धक हैं ॥ १८ ॥ कसायाणुवादेण कोधकसाई माणकसाई मायकसाई लोभकसाई बंधा ॥ १९ ॥ कषायमार्गणाके अनुसार क्रोधकषायी, मानकषायी, मायाकषायी और लोभकषायी बन्धक हैं ॥ अकसाई बंधा व अत्थ अबंधा वि अस्थि ।। २० ॥ अकषायी जीव बन्धक भी हैं और अबन्धक भी हैं ॥ २० ॥ उपशान्तकषायसे लेकर सयोगिकेवली तक कषायसे रहित हुए अकषायी बन्धक हैं, क्योंकि, उनके बन्धका कारण योग पाया जाता है । परन्तु अयोगिकेवली अकषायी हो करके भी अबन्धक हैं, क्योंकि, उनके योगका भी अभाव हो चुका है । सिद्धा अबंधा ।। २१ ।। सिद्ध अबन्धक हैं ॥ २१ ॥ [ ३४९ णाणाणुवादेण मदिअण्णाणी सुदअण्णाणी विभंगणाणी आभिणिबोहियणाणी सुदणाणी ओधिणाणी मणपज्जवणाणी बंधा ॥ २२ ॥ ज्ञानमार्गणाके अनुसार मत्यज्ञानी, श्रुताज्ञानी, विभंगज्ञानी, आभिनिबोधिकज्ञानी, श्रुतज्ञानी, अवधिज्ञानी और मन:पर्ययज्ञानी बन्धक हैं ॥ २२ ॥ haणाणी बंधा व अस्थि अबंधा वि अत्थि ॥ २३ ॥ केवलज्ञानी बन्धक भी हैं और अबन्धक भी हैं ॥ २३ ॥ कारण यह है कि केवलज्ञानियोंमें सयोगिकेवली बन्धक और अयोगिकेवली अबन्धक हैं । सिद्धा अबंधा ॥ २४ ॥ सिद्ध अबन्धक हैं ॥ २४ ॥ Jain Education International संजमाणुवादेण असंजदा बंधा, संजदासंजदा बंधा ॥ २५ ॥ संयममार्गणाके अनुसार असंयत बन्धक हैं और संयतासंयत भी बन्धक हैं ॥ २५ ॥ संजा बंधा व अस्थि अबंधा वि अत्थि ।। २६ ।। परन्तु संयत बन्धक भी हैं और अबन्धक भी हैं ॥ २६ ॥ संयतोंमें प्रमत्तसंयतोंसे लेकर सयोगिकेवली तक बन्धक और अयोगिकेवली अबन्धक हैं । व संजदा व असंजदा णेत्र संजदासंजदा अबंधा ॥ २७ ॥ जो न संयत हैं, न असंयत हैं, और न संयतासंयत भी हैं ऐसे सिद्ध जीव अबन्धक हैं ॥ दंसणाणुवादेण चक्खुदंसणी अचक्खुदंसणी ओधिदंसणी बंधा ॥ २८ ॥ दर्शनमार्गणा के अनुसार चक्षुदर्शनी, अचक्षुदर्शनी और अवधिदर्शनी बन्धक हैं ॥ २८ ॥ For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.600006
Book TitleShatkhandagam
Original Sutra AuthorPushpadant, Bhutbali
Author
PublisherWalchand Devchand Shah Faltan
Publication Year1965
Total Pages966
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationManuscript
File Size20 MB
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