________________
२५६ ]
छक्खंडागमे जीवट्ठाणं
[१, ८, ३४८
अपेक्षा तुल्य और अल्प हैं ॥ ३४७ ॥
उवसंतकसाय-बीदराग-छदुमत्था तत्तिया चेव ।। ३४८॥ उपशमसम्यग्दृष्टियोंमें उपशान्तकषाय-चीतराग-छद्मस्थ जीव पूर्वोक्त प्रमाण ही हैं ॥३४८॥ अप्पमत्तसंजदा अणुवसमा संखेज्जगुणा ॥ ३४९ ॥
उपशमसम्यग्दृष्टियोंमें उपशान्तकषाय-वीतराग छद्मस्थोंसे अनुपशामक अप्रमत्तसंयत जीव संख्यातगुणित हैं ॥ ३४९ ॥
पमत्तसंजदा संखेज्जगुणा ॥३५० ॥ संजदासंजदा असंखेज्जगुणा ॥ ३५१ ॥
• उपशमसम्यग्दृष्टियोंमें अनुपशामक अप्रमत्तसंयतोंसे प्रमत्तसंयत जीव संख्यातगुणित हैं ॥ ३५० ।। प्रमत्तसंयतोंसे संयतासंयत जीव असंख्यातगुणित हैं ॥ ३५१ ॥
असंजदसम्मादिट्ठी असंखेज्जगुणा ॥ ३५२ ॥ उपशमसम्यग्दृष्टियोंमें संयतासंयतोंसे असंयतसम्यग्दृष्टि जीव असंख्यातगुणित हैं॥३५२ ॥
असंजदसम्मादिद्वि-संजदासंजद-पमत्त-अप्पमत्तसंजदट्ठाणे उवसमसम्मत्तस्स भेदो णत्थि ।। ३५३ ॥
उपशमसम्यग्दृष्टियोंमें असंयतसम्यग्दृष्टि, संयतासंयत, प्रमत्तसंयत और अप्रमत्तसंयत गुणस्थानोंमें उपशमसम्यक्त्वका भेद नहीं है; इसलिये वहां सम्यक्त्वका अल्पबहुत्व सम्भव नहीं है ॥ ३५३ ।।
सासणसम्मादिहि-सम्मामिच्छादिहि-मिच्छादिट्ठीणं णस्थि अप्पाबहुअं ॥३५४॥ सासादनसम्यग्दृष्टि, सम्यग्मिथ्यादृष्टि और मिथ्यादृष्टि जीवोंका अल्पबहुत्व नहीं है ।
सणियाणुवादेण सणीसु मिच्छादिटिप्पहुडि जाव खीणकसाय-चीदराग-छदुमत्था • त्ति ओघं ॥ ३५५ ॥
संज्ञीमार्गणाके अनुवादसे संज्ञियोंमें मिथ्यादृष्टि गुणस्थानसे लेकर क्षीण-कषाय-वीतरागछद्मस्थ गुणस्थान तक जीवोंके अल्पबहुत्वकी प्ररूपणा ओघके समान है ॥ ३५५ ॥
णवरि मिच्छादिट्ठी असंखेज्जगुणा ॥ ३५६ ॥ विशेषता यह है कि संज्ञियोंमें असंयतसम्यग्दृष्टियोंसे मिथ्यादृष्टि जीव असंख्यातगुणित हैं ।। असण्णीसु णत्थि अप्पाबहुअं ।। ३५७ ॥ असंज्ञी जीवोंमें अल्पबहुत्व नहीं है ॥ ३५७ ॥ आहाराणुवादेण आहारएसु तिसु अद्धासु उवसमा पवेसणेण तुल्ला थोवा ॥३५८॥
आहारमार्गणाके अनुवादसे आहारकोंमें अपूर्वकरण आदि तीन गुणस्थानोंमें उपशामक वीज प्रवेशकी अपेक्षा तुल्य और अल्प हैं ॥ ३५८ ॥
Jain Education International
For Private & Personal Use Only
www.jainelibrary.org