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________________ अप्पा हुगागमे आहारमग्गणा उवसंत कसायचीदराग - छदुमत्था तत्तिया चेव ॥ ३५९ ॥ आहारकोंमें उपशान्तकषाय- वीतराग छद्मस्थ जीव पूर्वोक्त प्रमाण ही हैं ॥ ३५९ ॥ खवा संखेज्जगुणा || ३६० ।। खीणकसाय - वीदराग - छदुमत्था तत्तिया चेव ।। आहारकोंमें उपशान्तकषाय- वीतराग छद्मस्थोंसे क्षपक जीव संख्यातगुणित हैं ॥ ३६० ॥ क्षीणकषाय- वीतराग-छद्मस्थ जीव पूर्वोक्त प्रमाण ही हैं ॥ ३६१ ॥ १, ८, ३७३ ] सजोगिकेवली पवेसणेण तत्तिया चेव || ३६२ || सजोगिकेवली अद्धं पडुच्च संखेजगुणा ।। ३६३ ।। आहारकोंमें सयोगिकेवली जिन प्रवेशकी अपेक्षा पूर्वोक्त प्रमाण ही हैं ॥३६२॥ वे ही सयोगिकेवली जिन संचयकालकी अपेक्षा संख्यातगुणित हैं ॥ ३६३ ॥ अप्पमत्त संजदा अक्खवा अणुवसमा संखेज्जगुणा ॥ ३६४ ॥ आहारकों में सयोगिकेविली जिनोंसे अक्षपक और अनुपशामक अप्रमत्तसंयत जीव संख्यातगुणित हैं ॥ ३६४ ॥ पत्तसंजदा संखेज्जगुणा || ३६५ || संजदासंजदा असंखेज्जगुणा || ३६६ ॥ आहारको उक्त अप्रमत्तसंयतों से प्रमत्तसंयत जीव संख्यातगुणित हैं ।। ३६५ ॥ प्रमत्तसंयतोंसे संयतासंयत जीव असंख्यातगुणित हैं ॥ ३६६ ॥ [ २५७ सासणसम्मादिट्ठी असंखेज्जगुणा || ३६७ ॥ सम्मामिच्छादिट्ठी संखेज्जगुणा || आहारकोंमें संयतासंयतोंसे सासादनसम्यग्दृष्टि जीव असंख्यातगुणित हैं ॥ ३६७ ॥ सासादनस्म्यग्दृष्टियोंसे सम्यग्मिथ्यादृष्टि जीव संख्यातगुणित हैं ॥ ३६८ ॥ असंजदसम्मादिट्ठी असंखेज्जगुणा ॥ ३६९ ॥ मिच्छादिट्ठी अनंतगुणा || ३७० ॥ आहारकोंमें सम्यग्मिथ्यादृष्टियोंसे असंयतसम्यग्दृष्टि जीव असंख्यातगुणित हैं ॥ ३६९ ॥ असंयतसम्यग्दृष्टियोंसे मिथ्यादृष्टि जीव अनन्तगुणित हैं ॥ ३७० ॥ असंजद सम्मादिद्वि-संजदासंजद-यमत्त अप्पमत्त संजदड्डाणे सम्मत्तप्पाचहुअमोघं || आहारकोंमें असंयतसम्यग्दृष्टि, संयतासंयत, प्रमत्तसंयत और अप्रमत्तसंयत गुणस्थान में सम्यक्त्व सम्बन्धी अल्पबहुत्वकी प्ररूपणा ओघके समान है || ३७१ ॥ एवं तिसु अद्धासु || ३७२ ॥ इसी प्रकार आहारकोंमें अपूर्वकरण आदि तीन गुणस्थानों में सम्यक्त्व सम्बन्धी अरुपबहुत्व जानना चाहिये ॥ ३७२ ॥ सव्वत्थोवा उवसमा ।। ३७३ || खवा संखेज्जगुणा ॥ ३७४ ॥ आहारकों में इन गुणस्थानोंमें उपशामक जीव सबसे कम हैं ॥ ३७३ ॥ उपशामकोंसे छ. ३३ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.600006
Book TitleShatkhandagam
Original Sutra AuthorPushpadant, Bhutbali
Author
PublisherWalchand Devchand Shah Faltan
Publication Year1965
Total Pages966
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationManuscript
File Size20 MB
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