SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 377
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ छक्खंडागमे जीवद्वाणं उवसम सम्मादिट्ठी असंखेज्जगुणा ।। २९५ ॥ उक्त तीन लेश्यावाले जीवोंमें असंयतसम्यग्दृष्टि गुणस्थानवर्ती क्षायिकसम्यग्दृष्टियोंसे उपशमसम्यग्दृष्टि जीव असंख्यातगुणित हैं ॥ २९५ ॥ २५२ ] वेद सम्मादिट्ठी असंखेज्जगुणा ॥ २९६ ॥ उक्त तीन लेश्यावाले जीवोंमें असंयतसम्यग्दृष्टि गुणस्थानवर्ती उपशमसम्यग्दृष्टियों से वेदसम्यग्दृष्टि जीव असंख्यातगुणित हैं ॥ २९६॥ [ १, ८, २९५ वरि विसेसो, काउलेस्सिएस असजद सम्मादिट्ठिट्ठाणे सव्वत्थोवा उवसमसम्मादिट्ठी ।। २९७ ।। विशेषता केवल यह है कि कापोतलेश्यावालों में असंयतसम्यग्दृष्टि गुणस्थानमें उपशमसम्यग्दृष्टि जीव सबसे कम हैं ॥ २९७ ॥ खइयसम्मादिट्ठी असंखेज्जगुणा ।। २९८ ॥ कापोतलेश्यावालोंमें असंयतसम्यग्दृष्टि गुणस्थानवर्ती उपशमसम्यग्दृष्टियोंसे क्षायिकसम्यग्दृष्टि जीव असंख्यातगुणित हैं ॥ २९८ ॥ वेद सम्मादिट्ठी असंखेज्जगुणा ।। २९९ ।। कापोतश्यावालों में असंयतसम्यग्दृष्टि गुणस्थानवर्ती क्षायिकसम्यग्दृष्टियों से वेदसम्यग्दृष्टि जीव असंख्यातगुणित हैं ॥ २९९ ॥ तेउलेस्सिय-पस्म लेस्सिएसु सव्वत्थोवा अप्पमत्त संजदा ॥ ३०० ॥ तेजोलेश्या और पद्मलेश्यावाले जीवों में अप्रमत्तसंयत सबसे कम हैं ॥ ३०० ॥ पत्तसंजदा संखेज्जगुणा ।। ३०१ || संजदासंजदा असंखेज्जगुणा ॥ ३०२ ॥ तेजोलेश्या और पद्मलेश्यावालों में अप्रमत्तसंयतोंसे प्रमत्तसंयत जीव संख्यातगुणित हैं। ॥ ३०१ ॥ प्रमत्तसंयतोंसे संयतासंयत जीव असंख्यातगुणित हैं ॥ ३०२ ॥ सास सम्मादिड्डी असंखेज्जगुणा ॥ ३०३ ॥ उक्त दोनों लेश्यावालोंमें संयतासंयतों से सासादनसम्यग्दृष्टि असंख्यातगुणित हैं ॥ ३०३ ॥ सम्मामिच्छादिडी संखेज्जगुणा || ३०४ || असंजद सम्मादिट्ठी असंखेज्जगुणा ॥ उक्त दोनों लेश्यावालोंमें सासादन सम्यग्दृष्टियोंसे सम्यग्मिथ्यादृष्टि जीव संख्यातगुणित हैं ॥ ३०४ ॥ सम्यग्मिथ्यादृष्टियोंसे असंयतसम्यग्दृष्टि जीव असंख्यातगुणित हैं ॥ ३०५ ॥ मिच्छादिट्ठी असंखेज्जगुणा ॥ ३०६ ॥ उक्त दोनों लेश्यावालों में असंयतसम्यग्मिथ्यादृष्टि जीवोंसे मिथ्यादृष्टि असंख्यातगुणित हैं | अजद सम्मादिट्ठि-संजदासंजद - पमत्त - अप्पमत्त संजदट्ठाणे सम्मत्तप्पा बहुअमोघं ॥ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.600006
Book TitleShatkhandagam
Original Sutra AuthorPushpadant, Bhutbali
Author
PublisherWalchand Devchand Shah Faltan
Publication Year1965
Total Pages966
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationManuscript
File Size20 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy