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२४४] छक्खंडागमे जीवट्ठाण
[१, ८, १९८ खवा संखेज्जगुणा ॥ १९८ ॥ णवरि विसेसा, लोभकसाईसु सुहुमसांपराइयउवसमा विसेसाहिया ॥ १९९ ॥
उक्त चारों कषायवाले जीवोंमें उपशामकोंसे क्षपक जीव संख्यातगुणित हैं। १९८ ।। विशेषता यह है कि लोभकषायी जीवोंमें क्षपकोंसे सूक्ष्मसाम्परायिक उपशामक विशेष अधिक हैं ॥
खवा संखेज्जगुणा ॥ २० ॥ लोभकषायी सूक्ष्मसाम्परायिक उपशामकोंसे सूक्ष्मसाम्परायिक क्षपक संख्यातगुणित हैं । अप्पमत्तसंजदा अक्खवा अणुवसमा संखेज्जगुणा ॥ २०१ ।।
चारों कषायवाले जीवोंमें क्षपकोंसे अक्षपक और अनुपशामक अप्रमत्तसंयत संख्यातगुणित हैं ॥ २०१॥
पमत्तसंजदा संखेज्जगुणा ॥ २०२॥ चारों कषायवाले जीवोंमें अप्रमत्तसंयतोंसे प्रमत्तसंयत संख्यातगुणित हैं । २०२ ॥ संजदासजदा असंखेज्जगुणा ॥ २०३॥ चारों कषायवाले जीवोंमें प्रमत्तसंयतोंसे संयतासंयत असंख्यातगुणित हैं ॥ २०३ ॥ सासणसम्मादिट्ठी असंखेज्जगुणा ॥ २०४ ॥ चारों कषायवाले जीवोंमें संयलासंयतोंसे सासादनसम्यग्दृष्टि असंख्यातगुणित हैं ॥२०४॥ सम्मामिच्छादिट्ठी संखेज्जगुणा ॥ २०५ ॥ चारों कषायवाले जीवोंमें सासादनसम्यग्दृष्टियोंसे सम्यग्मिथ्यादृष्टि संख्यातगुणित हैं। असंजदसम्मादिट्ठी असंखेज्जगुणा ॥ २०६ ॥ चारों कषायवाले जीवोंमें सम्यग्मिथ्यादृष्टियोंसे असंयतसम्यग्दृष्टि असंख्यातगुणित हैं ॥ मिच्छादिट्ठी अणंतगुणा ॥ २०७॥ चारों कषायवाले जीवोंमें असंयतसम्यग्दृष्टियोंसे मिथ्यादृष्टि अनन्तगुणित हैं ॥ २०७ ॥ असंजदसम्मादिहि-संजदासंजद-पमत्त-अपमत्तसंजदट्ठाणे सम्मत्तप्पाबहुअमोघं ॥
चारों कषायवाले जीवोंमें असंयतसम्यग्दृष्टि, संयतासंयत, प्रमत्तसंयत और अप्रमत्तसंयत गुणस्थानमें सम्यक्त्व सम्बन्धी अल्पबहुत्वकी प्ररूपणा ओघके समान है ॥ २०८ ॥
एवं दोसु अद्धासु ॥ २०९ ॥
इसी प्रकार अपूर्वकरण और अनिवृत्तिकरण इन दो गुणस्थानोंमें चारों कषायवाले जीवोंका सम्यक्त्व सम्बन्धी अल्पबहुत्व जानना चाहिये ॥ २०९ ॥
सम्वत्थोवा उवसमा ॥ २१० ॥
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