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________________ १, ८, १९७] अप्पाबहुमाणुगमे कसायमग्गणा [२४३ नपुंसकवेदियोंमें प्रमत्तसंयत और अप्रमत्तसंयत गुणस्थानमें क्षायिकसम्यग्दृष्टि जीव सबसे कम हैं ॥ १८५॥ उवसमसम्मादिट्ठी संखेज्जगुणा ॥ १८६ ॥ वेदगसम्मादिट्ठी संखेज्जगुणा ॥ नपुंसकवेदियोंमें प्रमत्तसंयत और अप्रमत्तसंयत गुणस्थानमें क्षायिकसम्यग्दृष्टियोंसे उपशमसम्यग्दृष्टि संख्यातगुणित हैं ॥ १८६ ॥ उनसे वेदकसम्यग्दृष्टि जीव संख्यातगुणित हैं ॥ १८७ ॥ एवं दोसु अद्धासु ॥ १८८ ॥ इसी प्रकार नपुंसकवेदियोंमें अपूर्वकरण और अनिवृत्तिकरण इन दोनों गुणस्थानोंमें सम्यक्त्व सम्बन्धी अल्पबहुत्व जानना चाहिये ॥ १८८ ॥ सव्वत्थोवा उवसमा ॥ १८९ ॥ खवा संखेज्जगुणा ॥ १९० ॥ नपुंसकवेदियोंमें उपशामक जीव सबसे कम हैं ॥ १८९ ॥ उपशामकोंसे क्षपक जीव संख्यातगुणित हैं ॥ १९॥ अवगदवेदएसु दोसु अद्धासु उवसमा पवेसणेण तुल्ला थोवा ।। १९१ ॥ अपगतवेदियोंमें अनिवृत्तिकरण और सूक्ष्मसाम्पराय इन दो गुणस्थानोंमें उपशामक जीव प्रवेशकी अपेक्षा तुल्य और अल्प हैं ॥ १९१ ॥ उवसंतकसाय-वीदराग-छदुमत्था तत्तिया चेव ॥ १९२ ॥ अपगतवेदियोंमें उपशान्तकषाय-वीतराग-छद्मस्थ जीव पूर्वोक्त प्रमाण ही हैं ॥ १९२ ॥ खवा संखेज्जगुणा ॥१९३॥ खीणकसाय-चीदराग-छदुमत्था तत्तिया चेव ॥१९४ अपगतवेदियोंमें उपशामकोंसे क्षपक जीव संख्यातगुणित हैं ॥१९३॥ क्षीणकषाय-वीतरागछद्मस्थ पूर्वोक्त प्रमाण ही हैं ॥ १९४ ॥ . सजोगिकेवली अजोगिकेवली पवेसणेण दो वि तुल्ला तत्तिया चेव ॥ १९५॥ अपगतवेदियोंमें सयोगिकेवली और अयोगिकेवली ये दोनों ही प्रवेशकी अपेक्षा तुल्य और पूर्वोक्त प्रमाण ही हैं ॥ १९५॥ सजोगिकेवली अद्धं पडुच्च संखेज्जगुणा ॥ १९६ ॥ सयोगिकेवली संचयकालकी अपेक्षा संख्यातगुणित हैं ॥ १९६ ॥ कसायाणुवादेण कोधकसाइ-माणकसाइ-मायकसाइ-लोभकसाईसु दोसु अद्धासु उवसमा पवेसणेण तुल्ला थोवा ॥ १९७॥ ___कषायमार्गणाके अनुवादसे क्रोधकषायी, मानकषायी, मायाकषायी और लोभकषायियोंमें अपूर्वकरण और अनिवृत्तिकरण इन दो गुणस्थानोंमें उपशामक जीव प्रवेशकी अपेक्षा तुल्य और अल्प हैं ॥ १९७ ॥ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.600006
Book TitleShatkhandagam
Original Sutra AuthorPushpadant, Bhutbali
Author
PublisherWalchand Devchand Shah Faltan
Publication Year1965
Total Pages966
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationManuscript
File Size20 MB
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