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________________ १, ८, ११७] अप्पाबहुगाणुगमे जोगमग्गणा [२३७ असंख्यातगुणित हैं ॥ १०४ ॥ जोगाणुवादेण पंचमणजोगि-पंचवचजोगि-कायजोगि-ओरालियकायजोगीसु तीसु अद्धासु उवसमा पवेसणेण तुल्ला थोवा ॥ १०५ ॥ योगमार्गणाके अनुवादसे पांचों मनोयोगी, पांचों वचनयोगी, काययोगी और औदारिककाययोगियोंमें अपूर्वकरण आदि तीन गुणस्थानवर्ती उपशामक जीव प्रवेशकी अपेक्षा परस्पर तुल्य और अल्प हैं ॥ १०५॥ उवसंतकसाय-वीदराग-छदुमत्था तेत्तिया चेव ॥ १०६ ॥ उक्त बारह योगवाले उपशान्तकषाय-वीतराग-छद्मस्थ जीव पूर्वोक्त जीवोंके ही प्रमाण हैं । खवा संखेज्जगुणा ॥ १०७ ॥ खीणकसाय-वीदराग-छदुमत्था तेत्तिया चेव ॥ उनसे क्षपक संख्यातगुणित हैं ॥ १०७ ॥ क्षीणकषाय-वीतराग-छमस्थ पूर्वोक्त प्रमाण ही हैं ॥ १०८॥ सजोगिकेवली पवेसणेण तेत्तिया चेव ॥ १०९ ।। उक्त बारह योगोंमें सम्भव योगवाले सयोगिकेवली जीव प्रवेशकी अपेक्षा पूर्वोक्त जीवोंके ही प्रमाण हैं ॥ १०९ ॥ सजोगिकेवली अद्धं पडुच्च संखेज्जगुणा ॥ ११०॥ सयोगिकेवली संचयकालकी अपेक्षा उनसे संख्यातगुणित हैं ॥ ११० ॥ अप्पमत्तसंजदा अक्खवा अणुवसमा संखेज्जगुणा ॥ १११ ॥ सयोगिकेवलियोंसे उपर्युक्त बारह योगवाले अक्षपक और अनुपशामक अप्रमत्तसंयत जीव संख्यातगुणित हैं ॥ १११॥ पमत्तसंजदा संखेज्जगुणा ॥ ११२ ॥ संजदासजदा असंखेज्जगुणा ॥ ११३ ॥ उक्त बारह योगवाले अप्रमत्तसंयतोंसे प्रमत्तसंयत जीव संख्यातगुणित हैं ॥ ११२ ॥ प्रमत्तसंयतोंसे संयतासंयत असंख्यातगुणित हैं ॥ ११३ ॥ सासणसम्मादिट्ठी असंखेज्जगुणा ॥ ११४ ॥ सम्मामिच्छादिट्ठी संखेज्जगुणा । उक्त बारह योगवाले संयतासंयतोंसे सासादनसम्यग्दृष्टि जीव असंख्यातगुणित हैं ॥११४ सासादनसम्यग्दृष्टियोंसे सम्यग्मिथ्यादृष्टि जीव संख्यातगुणित हैं ॥ ११५ ॥ असंजदसम्मादिट्ठी असंखेज्जगुणा ॥ ११६ ॥ मिच्छादिट्ठी असंखेज्जगुणा, मिच्छादिट्ठी अणंतगुणा ॥ ११७ ॥ उक्त बारह योगत्राले सम्यग्मिध्यादृष्टियोंसे असंयतसम्यग्दृष्टि जीव असंख्यातगुणित हैं Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.600006
Book TitleShatkhandagam
Original Sutra AuthorPushpadant, Bhutbali
Author
PublisherWalchand Devchand Shah Faltan
Publication Year1965
Total Pages966
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationManuscript
File Size20 MB
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