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________________ काला गमे लेस्सामग्गणा अधिदंसणी ओधिणाणिभंगो ।। २८१ ।। अवधिदर्शनी जीवोंका काल अवधिज्ञानियोंके समान है ॥ २८९ ॥ केवलसणी केवलणाणिभंगो ॥ २८२ ॥ केवलदर्शनी जीवोंका काल केवलज्ञानियोंके समान है ।। २८२ ॥ लेस्सावादेण किण्हलेस्सिय - णीललेस्सिय काउलेस्सिएसु मिच्छादिट्ठी केवचिरं कालादो होंति ? णाणाजीवं पडुच्च सव्वद्धा || २८३ ॥ लेश्यामार्गणाके अनुवाद से कृष्णलेश्या, नीललेश्या और कपोतलेश्यावाले जीवोंमें मिथ्यादृष्टि जीव कितने काल होते हैं ? नाना जीवोंकी अपेक्षा सर्व काल होते हैं ॥ २८३ ॥ १, ५, २९१ ] एगजीवं पडुच्च जहणेण अंतोमुहुत्तं ॥ २८४ ॥ एक जीवकी अपेक्षा उक्त तीनों अशुभ लेश्यावाले जीवोंका जघन्य काल अन्तर्मुहूर्त है ॥ उक्कस्सेण तेत्तीस सत्तारस सत्त सागरोवमाणि सादिरेयाणि ।। २८५ ।। एक जीवकी अपेक्षा उक्त तीनों अशुभ लेश्यावाले मिथ्यादृष्टि जीवोंका उत्कृष्ट काल क्रमशः साधिक (दो अन्तर्मुहूर्तोसे अधिक ) तेतीस सागरोपम, साधिक सत्तरह सागरोपम और साधिक सात सागरोपम प्रमाण है ॥ २८५ ॥ [ १६३ सास सम्मादिट्ठी ओघं ॥ २८६ ॥ उक्त तीनों अशुभ लेश्यावाले सासादनसम्यग्दृष्टि जीवोंका काल ओघके समान है ॥२८६ सम्मामिच्छादिट्ठी ओघं ॥ २८७ ॥ उक्त तीनों अशुभ लेश्यावाले सम्यग्मिथ्यादृष्टि जीवोंका काल ओघके समान है ॥२८७॥ असजद सम्मादिट्ठी केवचिरं कालादो होंति ? णाणाजीवं पडुच्च सव्वद्धा ।। २८८ उक्त तीनों अशुभ लेश्यावाले असंयतसम्यग्दृष्टि जीव कितने काल होते हैं ? नाना जीवोंकी अपेक्षा सर्व काल होते हैं ॥ २८८ ॥ एगजीवं पडुच्च जहणेण अंतोमुहुत्तं ॥ २८९ ॥ एक जीवकी अपेक्षा उक्त तीन अशुभ लेश्यावाले असंयतसम्यग्दृष्टि जीवोंका जघन्य काल अन्तर्मुहूर्त है ॥ २८९ ॥ उक्कस्सेण तेत्तीस सत्तारस सत्त सागरोवमाणि देखणाणि ।। २९० ॥ एक जीवकी अपेक्षा उक्त जीवोंका उत्कृष्ट काल यथाक्रमसे कुछ कम तेतीस सागरोपम, सत्तरह सागरोपम और सात सागरोपम है ।। २९०॥ तेउलेस्सिय-पम्मलेस्सिएसु मिच्छादिट्ठी असंजदसम्मादिट्ठी केवचिरं कालादो होंति ? णाणाजीवं पडुच्च सव्वद्धा ।। २९१ ।। Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.600006
Book TitleShatkhandagam
Original Sutra AuthorPushpadant, Bhutbali
Author
PublisherWalchand Devchand Shah Faltan
Publication Year1965
Total Pages966
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationManuscript
File Size20 MB
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