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________________ १०६ ] छक्खंडागमे जीवद्वाणं कालकी अपेक्षा कुछ कम छह बटे चौदह भाग स्पर्श किये हैं ॥ २१ ॥ सास सम्मादिट्ठि सम्मामिच्छादिट्टि असंजद सम्मादिट्ठीहि केवडियं खेत्तं फोसिदं 8 लोगस्स असंखेज्जदिभागो ।। २२ ॥ सातवीं पृथिवीके सासादनसम्यग्दृष्टि, सम्यग्मिथ्यादृष्टि और असंयतसम्यग्दृष्टि नारकियों ने कितना क्षेत्र स्पर्श किया है ? लोकका असंख्यातवां भाग स्पर्श किया है ? ॥ २२ ॥ सातवीं पृथिवीमें इन तीनों गुणस्थानवर्ती जीवोंके मारणान्तिक और उपपाद ये दो पद नहीं होते हैं, शेष पांच पद होते हैं । [ १, ४, २१ तिरिक्खगदीए तिरिक्खेसु मिच्छादिट्ठीहि केवडियं खेत्तं फोसिदं १ ओघं ||२३|| तिर्यंचगतिमें तिर्यंचोंमें मिथ्यादृष्टि जीवोंने कितना क्षेत्र स्पर्श किया है ? ओघके समान सर्व लोक स्पर्श किया है ॥ २३ ॥ सास सम्मादिट्ठीहि केवडियं खेत्तं फोसिदं ? लोगस्स असंखेजदिभागो ॥ २४ ॥ सासादनसम्यग्दृष्टि तिर्यंच जीवोंने कितना क्षेत्र स्पर्श किया है ? लोकका असंख्यातवां भाग स्पर्श किया है ॥ २४ ॥ सत्त चोदभागा वा देखणा || २५ || मारणान्तिकसमुद्घातको प्राप्त हुए सासादनसम्यग्दृष्टि तिर्यंचोंने भूत और भविष्य कालकी अपेक्षा कुछ कम सात बटे चौदह भाग स्पर्श किये हैं ॥ २५ ॥ सम्मामिच्छादिट्ठीहि केवडियं खेत्तं फोसिदं ? लोगस्स असंखेजदिभागो ||२६|| सम्यग्मिथ्यादृष्टि तिर्यंचोंने कितना क्षेत्र स्पर्श किया है : लोकका असंख्यातवां भाग स्पर्श किया है ॥ २६ ॥ असंजद सम्मादिट्ठि-संजदासंजदेहि केवडियं खेत्तं फोसिदं ? लोगस्स असंखेजदिभागो ।। २७ ।। असंयतसम्यग्दृष्टि और संयतासंयत तिर्यंचोंने कितना क्षेत्र स्पर्श किया है ? लोकका असंख्यातवां भाग स्पर्श किया है ? ॥ २७ ॥ छ चोदसभागा वा देखणा ॥ २८ ॥ मारणान्तिकसमुद्घातगत उक्त दोनों गुणस्थानवर्ती तिर्यंच जीवोंने अतीत और अनागत कालकी अपेक्षा कुछ कम छह बटे चौदह भाग स्पर्श किये हैं ॥ २८॥ पंचिदियतिरिक्ख-पंचिदियतिरिक्खपजत्त-पंचिदियतिरिक्खजोणिणीसु मिच्छादिडीह वडियं खेत्तं फोसिदं ? लोगस्स असंखेज्जदि भागो ।। २९ ।। Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.600006
Book TitleShatkhandagam
Original Sutra AuthorPushpadant, Bhutbali
Author
PublisherWalchand Devchand Shah Faltan
Publication Year1965
Total Pages966
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationManuscript
File Size20 MB
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