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अनेकान्त 72/3, जुलाई-सितम्बर, 2019
अध्ययन को भी सम्मिलित किया जा सकेगा, जिससे श्रावक श्रावकाचारों के अध्ययन से अपने श्रावक धर्म का तो सम्यक् निर्वाह कर ही सकेंगे। यदि पुण्योदयवश संसार से विरक्त होकर साधु बनें तो साधु बनने के पूर्व मूलाचार, भगवती आराधना, अनगार धर्मामृत आदि के अध्ययन से मुनि धर्म को भी यथार्थ रूप में समझ सकेंगे।
-डॉ. जयकुमार जैन
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