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________________ 72 ANEKANTA - ISSN 0974-8768 स्वामी ने भी उक्त आशय का एक श्लोक अष्टसहस्री में उद्धृत किया है।" आचार्य अकलंकदेव ने न्यायविनिश्चय में कहा है कि आत्मा में समस्त पदार्थों को जानने की पूर्ण सामर्थ्य है। संसारी अवस्था में उसका ज्ञान ज्ञानावरण कर्म से आवृत रहता है। अतः उसका पूर्ण प्रकाश नहीं हो पाता है; किन्तु जब ज्ञान के प्रतिबन्धक कर्म का पूर्ण क्षय हो जाता है, तब उस ज्ञान के द्वारा समस्त पदार्थों को जानने में क्या बाधा है? आचार्य अकलंकदेव ने सर्वज्ञता विषयक युक्तियां दी हैं। उनके अनुसार आत्मा में समस्त पदार्थों को जानने की सामर्थ्य है। इस सामर्थ्य के होने से ही कोई पुरुष विशेष के द्वारा भी सूक्ष्मादि ज्ञेयों को जानने में समर्थ हो सकता है अन्यथा नहीं। द्वितीय युक्ति के अनुसार यदि पुरुषों को धर्माधर्मादि अतीन्द्रिय ज्ञेयों का ज्ञान न हो तो सूर्य, चन्द्रादि ग्रहों की ग्रहण आदि की भविष्यत् दशाओं और उनसे होने वाला शुभाशुभ का अविसंवादी उपदेश कैसे हो सकेगा? तृतीय युक्ति के अनुसार जिस प्रकार अणु परिमाण बढ़ता-बढ़ता आकाश में महापरिमाण या विभुत्व का रूप ले लेता है, क्योंकि उसकी तरतमता देखी जाती है, उसी तरह ज्ञान के प्रकर्ष में भी तारतम्य देखा जाता है। अतः जहां वह ज्ञान सम्पूर्ण अवस्था (निरतिशयपने) को प्राप्त हो जाता है, वहीं सर्वज्ञता आ जाती है। अंतिम युक्ति अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। इसमें उन्होंने कहा है कि सर्वज्ञता का कोई बाधक प्रमाण नहीं है। प्रत्यक्ष आदि पांच प्रमाण तो इसके लिए बाधक नहीं हो सकते, क्योंकि वे विधि (अस्तित्व) को विषय करते हैं। यदि वे सर्वज्ञता के विषय में दखल दें तो उनसे सर्वज्ञता का सद्भाव ही सिद्ध होगा। मीमांसकों का अभाव प्रमाण भी उसका निषेध नहीं कर सकता, क्योंकि अभाव प्रमाण के लिए यह आवश्यक है कि जिसका अभाव करना है उसका स्मरण और जहा उसका अभाव करना है, वहाँ उसका प्रत्यक्ष दर्शन आवश्यक ही नहीं प्रत्युत अनिवार्य है। इस तरह जब कोई बाधक नहीं है तो कोई कारण नहीं कि सर्वज्ञता का सद्भाव सिद्ध न हो। इस प्रकार से जैनाचार्यों ने विविध ग्रन्थों में युक्ति एवं आगम द्वारा सर्वज्ञ की व्याख्या प्रस्तुत की है।
SR No.538072
Book TitleAnekant 2019 Book 72 Ank 07 to 09
Original Sutra AuthorN/A
AuthorJaikumar Jain
PublisherVeer Seva Mandir Trust
Publication Year2019
Total Pages100
LanguageHindi
ClassificationMagazine, India_Anekant, & India
File Size2 MB
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