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________________ अनेकान्त 72/3, जुलाई-सितम्बर, 2019 55 यहीं पास में पद्मासन में विराजित जिनबिम्ब को दो मुकुटधारी परिचारिकाएं कलश लिए हुए अभिषेक करने हेतु तैयार हैं। सम्भवतः यह जन्म कल्याणक महोत्सव का दृश्य है। संगीत व आमोद-प्रमोद के विषयों में यहीं आगे शेर की लड़ाई, सिंह के मुख में हाथ डालकर कटार से प्रहार करती मानव आकृति, हाथ में कटार लेकर मल्लयुद्ध करते दो पहलवान आदि विशेष कौतूक पैदा करते है। यहीं आगे दो स्त्रियाँ ऊँचा जूड़ा बनाये आसन पर बैठी हैं। नृत्यशाला के अन्य दृश्य में वादकों एवं गायकों से घिरी अतिभंग मुद्रा में नृत्यांगना उत्कीर्ण है। इसी दृश्य में किनारे पर दाढ़ी वाली पुरुष आकृति एक हाथ ऊपर उठाये गाते हुए अंकित है। सम्भवतः यह संगीताचार्य है। इसी प्रकार के अनेक आकर्षक दृश्य मन्दिर परिसर में स्थित भद्रदेवकूलिका में अंकित हैं। श्री ऋषभदेव में आमोद-प्रमोद के कुछ अन्य विषयों का अंकन देखने में आता है तथा दैनिक क्रिया-कलापों से सम्बन्धित प्रसाधन, 'पोलो खिलाड़ी' भी विषय के रूप में उत्कीर्ण हुए हैं। यह विषय रुचिकर बन पड़े इस प्रकार जिनालयों में शिल्पकार ने संगीत, आमोद-प्रमोद, दैनिक क्रिया-कलापों आदि विषयों को उत्कीर्ण कर तत्कालीन समाज के पक्ष को भी उजागर किया। मिथुनाकृतियाँ देवालयों में मिथुनाकृतियों के अंकन का प्रचलन अत्यंत प्राचीनकाल से ही रहा है। प्रणयरत युग्मों के अंकन में शिल्पियों की कुत्सित भावनाएं नहीं रहीं, वरन् यह तो 'मानव का प्रकृति से प्रेम' की भावना का परिणाम है। कोमल व सुन्दर वस्तुओं के प्रति उसका सहज ही आकर्षित होना स्वाभाविक है। पुरुष और प्रकृति का संयोग, भोग एवं अपवर्ग, दोनों ही बातों का मार्ग प्रदर्शन करता है। शिल्पकार अपनी कला में रचनाधर्मिता को तो प्रदर्शित करता ही है, किन्तु समाज के महत्त्वपूर्ण पक्षों को अनदेखा भी नहीं कर सकता। प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से समकालीन अन्य कलाओं, साहित्य आदि का प्रभाव शिल्पियों पर पडना भी स्वाभाविक था।
SR No.538072
Book TitleAnekant 2019 Book 72 Ank 07 to 09
Original Sutra AuthorN/A
AuthorJaikumar Jain
PublisherVeer Seva Mandir Trust
Publication Year2019
Total Pages100
LanguageHindi
ClassificationMagazine, India_Anekant, & India
File Size2 MB
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