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________________ अनेकान्त/55/1 ब्राम्ही लिपि के आविष्कार में सहयोगी हुए? 4(1) 13-20 जनवरी 92. तथा 5(3), 155-171, जुलाई 93. 2. मजूमदार, क्लासिल एकाउन्ट ऑफ इंडिया, 210 3. श्री राम गोयल, प्राचीन भारतीय अभिलेख संग्रह, खण्ड-1, पृष्ठ 18-27, जयपुर 82 4. आचार्य विद्यानन्द, मोहन जोदड़ो : जैन परम्परा और प्रमाण, ऋषभ सौरभ 92, पृष्ठ 1-8 5. विमल सूरि, पउमचरियं, 4/68-69 6. वीरसेनाचार्य, छक्खंडा - मंगलायारण, 1/1/25 7. जिनसेनाचार्य, आदि पुराण 24/73-74 8. वही-15/36 एवं पार्श्वदेव समयसार 7/96 9. अर्हददास, पुरूदेवचम्पू प्रबंध ।।। 10. विष्णु पुराण 1/22/35 11. शैव ग्रन्थ, लिंगपुराण 12. ऋग्वेद 10/136/2 13. तैतिरीय आरण्यक 1/26/7 14. डॉ. फूलचन्द प्रेमी, व्रात्य और श्रमण संस्कृति, ऋषभ सौरभ 92 पृष्ठ 70-81 15. उपाध्याय अमर मुनि, भगवान ऋषभ देव : महर्षि शुक्रदेव की दृष्टि में ऋ. सौ. 92 पृष्ठ 9-13 -एन, 14 चेतकपुरी, ग्वालियर
SR No.538055
Book TitleAnekant 2002 Book 55 Ank 01 to 04
Original Sutra AuthorN/A
AuthorJaikumar Jain
PublisherVeer Seva Mandir Trust
Publication Year2002
Total Pages274
LanguageHindi
ClassificationMagazine, India_Anekant, & India
File Size8 MB
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