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________________ सबका उदय (महात्मा भगवानदीन) एक कहावत है 'दूसरेकी थालीका भात मीठा लगता नहीं कि वह सूरजके लिए भी भला होगा। आज यह बात कोन है। बोलीके मामलेमें यह कहावत पढ़े-लिखोंपर पूरी-पूरी नहीं जानता कि जिस वक्त हिन्दुस्तानमें सूरज निकलता है लागू होती है । हिन्दुस्तानमें कालेज और स्कूलके विद्यार्थी उस वक्त वह अमरीकामें डूब रहा होता है, जापानमें सिर भी इससे नहीं बच पाये। सबको अपनी बोली पसन्द न आकर पर होता है। तब सूरजके उदय होनेका क्या अर्थ रह जाता दूसरोंकी बोली भली मालूम होती है । विद्यार्थी अंग्रेजीमें है ? उसका हरदम उदय हरदम अस्त और हरदम उत्थान जो रस लेता है वह अपनी बोलीमें नही । पंडित और मौलवी है। सूरजके उदयकी बात अगर हम सोचें और उसके उदयके संस्कृत और अरबीमें जितना रस लेते है उतना अपनी बोलीमें लिए हम कुछ करने लगें तो हो सकता है जापानी नही । सबका उदय करना चाहते हैं और उसका नाम रखा हमसे बिगड़ बैठें क्योंकि जितना-जितना हम अपने यहां सूरजहै सर्वोदय । हिन्दुस्तानमें एक पेड़ है जिसका नाम है सर्व। के उदयके लिए जोर लगायेंगे उतना-उतना जापानमें सूरजगांववाले, हो सकता है, सर्वोदय शब्दसे उसी पेड़का उदय अस्त होगा। सूरजका निकलना डूबना, हर वक्त होता रहता समझलें । है। सूरजकी तरह हम सबका भी यही हाल है। मै जब छोटा था, मेरी नानी सुबह उठते ही कहा करती लोग बूढ़े होकर बचपनकी बहुत याद करने लगते हैं। थी, “सबका भला हो"। कितना प्यारा और मीठा बोल है। इसकी वजह यह भी हो सकती है कि उनको जल्दी हिन्दू जिस बच्चेके कानमें पड़े, वह समझले कि नानी क्या कह रही धर्मके अनुसार, मरकर बच्चा बनना है, पर जवान तक है । सर्वोदय सुनकर छोटा बच्चा कुछ न समझ पायगा। कभी-कभी, अपने बचपनकी याद कर बैठते हैं और चाहते हां, अपनी आदतके अनुसार अपनी जीभको घुमा-फिराकर है, बच्चा होते तो अच्छा होता । अब सर्वोदयके विश्वासियोंसे किसी तरह ठीक-ठीक उसे रट लेगा। सर्वोदयका ठीक-ठीक हम यह पूछना चाहते है कि जब वह किसी बालकका उदय मतलब उसकी समझमें कब आयेगा, कौन जाने। करने बैठेंगे तो बहरहाल उसे जवान बनायेंगे यानी उसके सर्वोदय नामसे हम 'सबकी भलाई करना चाहते बालकपनका अस्तकर देंगे, फिर उनका उदय क्या रह गया? है। पर सर्वोदय शब्दसे सबकी भलाई नही टपकती। सर्वोदय- और उदयके माने अगर वह निकलनेके होते हैं तो जवानीके के दो टुकड़े सर्व और उदय अलग-अलग बहुत लोग समझ उदयमें बालकपनका अस्त हुआ, फिर सबका उदय और लेते है, पर उदयका मतलब जो वह समझते है उसके लिए सबका अस्त एक बात हो गई। हिन्दी शब्द है निकलना। पंडितोंकी बहुत मेहनतसे सूर्योदय हमारे पाठक यह बिलकुल न समझें कि हम बेमतलब शब्द हमारे कुछ बालकोकी जीभपर चढ़ गया है पर गांवके शब्दोंकी बहस ले बैठे है। सचमुच हमारी समझमें सर्वोदयकी लड़के तो सूरज निकलना ही कहते है। अब उदयका अर्थ बात नहीं आती। हमें ऐसा मालूम होता है, जिस सर्वोदयकी रहा निकलना। बात लेकर हम खड़े हुए है वह प्रकृतिमें हर छिन होता रहता सूर्योदय यानी सूरजका निकलना पथ्वीपर रहनेवालों- है। अगर प्रकृतिके इस काममें, हम सब, कहीं हाथ बंटाने के लिए बारी-बारीसे अच्छा मालूम होता है । रोज-रोज बैठ गये तो कुछ नुकसान न कर बैठे ? उदय होनेपर उसकी भलाई कम नही हो पाती। सूरजका महावीर और बुद्धने जवानीमें जब अपना घर छोड़ा, उदय होना हम लोगोंके लिए मला है, यह इस बातका सबूत राज छोड़ा तब उन दोनोंका उदय हुमा या अस्ती उन
SR No.538011
Book TitleAnekant 1952 Book 11 Ank 01 to 12
Original Sutra AuthorN/A
AuthorJugalkishor Mukhtar
PublisherVeer Seva Mandir Trust
Publication Year1952
Total Pages484
LanguageHindi
ClassificationMagazine, India_Anekant, & India
File Size29 MB
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