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________________ (पृ ४. से आगेका अंश) तथा स्वास्थ्य तककी बलि चढ़ानेसे वह इस रूपमें सम्पस ही इसे वीरसेवामन्दिरसे राजगिरि,राजगिरिसे कलकत्ता हो सका है। अतः इसके लिये बाबू छोटेलालजी जैसे मूक लेगये, कलकत्ताकी सारी मशीनरीके वे ही एक मूविंग- सेवकका जितना भी मामार माना जाय और उन्हें जितना एजिन ( Moving Enging ) रहे हैं और उन्हींकी भी धन्यवाद दिया जाय यह सब थोरा है। भाप स्वस्थता योजनामों, महीनोंके अनथक परिश्रमों, ग्यक्तिगत प्रभावों के साथ दीर्घ जीवी हों, यही अपनी हार्दिक भाषना है। सम्मेदशिखरका ज़हरीला पानी भसेंसे भीसम्मेद शिखर तीर्थ-मधुवनके पानीकी और इस लिये वे उस दृषित जलको पकाकर अथवा विना शिकायत और उससे होने वाली प्राणोंकी हानिकी कहानियों पकाए ही पीनेके लिये मजबूर होते हैं ! जिन यात्रियोंके बराबर सुनने में भारही हैं। परन्तु अभी तक उसके सुधार धनमे ये सब कोठियां खड़ी हैं, जिनसे अनेक खातों में चन्दा का कोई प्रबन्ध नहीं किया गया। इस बार कलकत्ता वीर- माँगा जाता है और जो मधुवनकी सारी समृद्धिके मूल हैं शासन महोत्सवको जाते हुए अथवा उससे लौटते हुए उनके जीवनके साथ यह खिलवार, यह मात्राही और बहुतसे यात्री श्रीसम्मेद शिखर पहुँचे हैं और उनमेंसे प्रायः यह उपेक्षा !! बड़ी ही शर्म तथा लज्जाकी बात है !!! इस ..प्रतिशत व्यक्तियोंके मलेरिया स्वरसे पीड़ित होने की सारी जिम्मेदारी तीर्थक्षेत्रके प्रबन्धकों, तीर्थक्षेत्रकमेटी समाचार मिल रहे हैं, जिनमेंसे कांको भारी प्रायोंकी और उसके सदस्योंपर है। उन्हें शीघ्र ही अपनी जिम्मेदारी पाजी लगानी पड़ी और कुछ तो अपनी जानसे भी हाथ धो को ममझ कर जलके दोषको दूर करने, भास-पासकी गन्दगी बैठे हैं ! यह बरे ही खेदका विषय है !! श्री सिंघई पसा- को माफ कराने और समस्त यात्रियोंके लिये शुद्ध-निर्दोष नामजी भमरावती तो अपने घर भी न पहँचने पाए और जल के प्रबन्धका पूरा पत्न करने में अब जरा भी विलम्बन मार्गमें ही भाराकी तरफ उनका देहान्त हो गया ! उनके करना चाहिय और जब तक यह मुख्य कार्य न हो जाय, इस निधनसे पदी सनसनी फैल गई है। भाप समाजके जिप्सके विना इतना महान् तीर्थक्षेत्र कलंकित हो रहा है, पुराने नेता, दानी. तथा राष्ट्रीय कार्यकर्ता थे, ऐक्स पम० तब तक तामीर जैसे कामों में शक्तिका कोई अपम्ययन किया एल. पी. और पापने राहत के लिये जेलयात्रा भी जाय। और पटि ने ऐसा करने में असमर्थ हैं तो उनमें की थी। भभी कलकत्तामे मापने ४-५ मास बाद वीरसेवा- अपनी उस असमर्थताकी स्पष्ट घोषणा कर देनी चाहिये, दरमें पाकर रहने और उसे अपनी फ्री सेवाएं अर्पण जिससे मामाजिक व्यक्तियों के प्राणोंका मूल्य समझने वाले करनेका वचन भी दिया था, इससे मुझे मापके इस पाक- दूसरे कार्यकुशल महानुभाव मागे माएँ और कार्य स्मिक निधनसे और भी अधिक प्राघात पहुँचार करके दिखलाएं। और यदि किसी तरह भी मधुवनमे ब्रह्मचारी नौरंगलालजीके देहावसानकी भी ऐसी ही घटना निर्दोष जलकी सप्लाई का कोई प्रबन्ध न बन सकता हो, सुनने में भारही है!! जो कल्पनासे बाहरकी बात जान पड़ती है, तो फिर मैं भी कलकत्तासे अनेक सापियोंके साथ, जो प्रायः मीमियाघाट मादिकी तरफसे यात्रा जारी कर देना ही श्रेयसभी भाकर बीमार पड़े हैं, श्री सम्मेदशिखरकी यात्राको कर होगा और उधर ही कुछ धर्मशालाएँ बन जानी गया था और मैंने मधुवनके पानीको बहुत ही दूषित करवा- चाहिये । मधुवनकी धर्मशालाओंके मोहवश कीमती जानों कसाथक्षा तथा विषैला पाया है। पकाकर पीनेमें भी अथवा यात्रियोंके जीवनको खतरेमें रानना किसी सा भी स्वादमें कुछ विकृति बनी रहती थी। साथ ही तेरहपन्यी अयस्कर नहीं कहा जा सकता। भाशा है तीर्थक्षेत्रकमेटी कोठीसे यह भी मालूम हुआ कि वहाँ कोठियोंके प्रबन्धक और तीर्थ के प्रबन्धक अपनी गुरुतर जिम्मेदारीको समझेंगे अपने लिये तो कोठियोंकी लगारी द्वारा तीन मीनके और इस प्रतीव प्रावश्यक कार्यकी और सबसे पहले कासखेपर एक गांवके कुएँसे रोजाना पानी मगाते हैं परन्तु पूरा ध्यान देंगे। बाधिक क्षिपन्य विवॉप जवा कोई प्रबन्ध नहीं, सम्पादक
SR No.538007
Book TitleAnekant 1945 Book 07 Ank 01 to 12
Original Sutra AuthorN/A
AuthorJugalkishor Mukhtar
PublisherVeer Seva Mandir Trust
Publication Year1945
Total Pages528
LanguageHindi
ClassificationMagazine, India_Anekant, & India
File Size15 MB
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