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________________ नाम-माला - -- (मंगलाचरण और प्रतिज्ञा) त्रिदस विबुध पावकवदन, अमर अजर असुगरि । ॐकार परणाम करि, भानु सुगुरु धरि चित्त। श्रादितय सुर देवता, सुमनस अंबरचारि ॥१०॥ रक्यौं सुगम नामावली, बाल-विबोध निमित्त ॥ १॥ 'प्रजानाथ वेधा दुहिन, कमलासन लोकंस । सबदसिंधु मंथान करि, प्रगट सुअर्थ विचार। धातृ विधाता चतुर्मग्व, विधि विरंचि देवेम ।।११।। भाषा करै बनारसी, निज-गति-मति-अनुसार ॥२॥ १°नारायन वसुदेवसुत, दामोदर गोपीस । भाषा प्राकृत संसकृत, त्रिविधि सु सबद समेत। अचुत त्रिविक्रम चतुर्भज, वनमाली जगदीस ॥१२॥ जानि वग्वानि सुजान तह, ए पद पूरन हेत ॥३॥ मधुरिपु बलिरिपु वानरिपु, दानवदलन मुगरि । विषय-प्रवेश कसविधंसन पीनपट, कैटभारि नरकारि ॥ १३ ।। 'तीर्थकर सर्वज्ञ जिन, भवनासन भगवान । कमव कृष्ण मुकुंद प्रज, अंबुजनैन अनंत । पुरुषोत्तम प्रागत सुगत, संकर परमसुजान ॥४॥ वासुदेव बलबंधु सिव, ग्मन राधिकाकत ॥१४॥ बुद्ध मारजित केवली, वीनगग अग्हित । पदमनाभि पदमारमन, गरुडासन गोपाल । धरमधुरंधर पारगत, जगदीपक जयवंत ॥५॥ पुरुषोत्तम गाविद हरि, जलसाई नंदलाल ।।१।। अलख निरंजन निरगुनी, जोतिरूप जगदीस। मुरलीधर सारंगधर, संग्व-चक्रधर स्याम । अविनासी आनंदमय, अमल अमूरति ईस ॥ ६॥ सौरि गदाधर गिरिधरन, देवकिनंदन नाम ।।१६।। गौर विसद अरजुन धवल, स्वेत सुकल सितवान। रमा लच्छि पदमालया, लोकजननि हरिनारि । *मोख मुकति वैकुंठ सिव, पंचमगनि निर्वानx ॥७॥ कमला पदमा इंदरा, क्षीरसमुद्र-कुमारि ।।१७।। "सरस्वति भगवति भारती, हंसवाहनी वानि। १२कामपाल रेवतिरमन, रोहिनिनंदन नाम । वाकवादनी सारदा, मतिविकासनी जानि ॥८॥ नीलवसन कुसली हली, सीरपानि बलनाम ।।१८।। 'सुरग सुगलय नाक दिव, देवलोक सुरवास। सतवादी धम्मातमज, सोमवंम-राजान । *पुहकर गगन विहाय नभ, अंतरीक्ष भाकाम ॥९॥ भीम वृकोदर पवनसुत, कीचकरिपु बलवान ।।१९।। १ तीर्थकरनाम २ सिद्धनाम ३ वेतवर्णनाम ४ मोक्षनाम "जिष्णु धनंजय फालुगुन, करनहरन कपिकेत । xनाटक समयसारमें इस नामका निम्न पद्य पाया जाता है:- असरदलन गांडीवधर, इंद्रननुज हयसेत ॥२०॥ सिद्धक्षेत्र त्रिभुवनमुकुट, शिवथल अविचलथान । "शंभु त्रिलोचन गौरिपति, हर पसुपति त्रिपुरारि । मोस्व मुकति वैकुठ शिव, पंचमगति निरवान ||४२।। ५सरस्वतिनाम ६ देवलोकनाम ७ प्राकाशनाम मनमथहरन पिनाककर, नीलकंठ विषधारि ।।२१।। * नाटक समयसारमें इस नामका निन्न पद्य पाया जाता है:- ८ देवनाम ६ ब्रह्मानाम १. विष्णु (कृष्ण) खं विहाय अंबर गगन, अंतरिन्छ जगधाम । नाम " लक्ष्मीनाम १२ बलभद्रनाम १३ युधिष्ठिरव्योम नियत नभ मेघपथ, ये अकासके नाम ॥३८॥ नाम १४ भीमनाम १५ अर्जुननाम १६ महादेवनाम
SR No.538004
Book TitleAnekant 1942 Book 04 Ank 01 to 12
Original Sutra AuthorN/A
AuthorJugalkishor Mukhtar
PublisherVeer Seva Mandir Trust
Publication Year1942
Total Pages680
LanguageHindi
ClassificationMagazine, India_Anekant, & India
File Size73 MB
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